
Bail on Social Service: नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि इस युवक को एक बेहतर सिटीजन बनने के लिए समाज सेवा की सजा सुनाई जाती है। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद पाठक की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि लड़का बीबीए स्टूडेंट है और उस पर नाबालिग से छेड़छाड़ का आरोप लगा है। उसे सुधार का अवसर देते हुए इस शर्त के साथ जमानत दी जाती है कि वह दो माह तक प्रति शनिवार व रविवार को जिला अस्पताल में सुबह नौ से एक बजे तक सेवा करेगा।
इस दौरान वह अस्पताल में काम करने वाले कंपाउंडर्स की मदद करेगा। साफ-सफाई के साथ मरीजों की हर संभव मदद भी करेगा। रजिस्ट्रेशन के काम में उसे मरीजों का सहयोग करना होगा। वस्तुत: इस तरह युवक सामाजिक जिम्मेदारी समझेगा और बेहतर नागरिक बनेगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि इस तरीके से यह लड़का अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझेगा और एक बेहतर नागरिक बनेगा। यदि उसने इन शर्तों का उल्लंघन किया तो उसकी जमानत निरस्त कर दी जाएगी। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 22 जुलाई को नियत की गई है।

दरअसल, भोपाल निवासी अभिषेक शर्मा पर आरोप है कि वह एक नाबालिग लड़की का पीछा करता है। बेवजह उसे फोन करता है और भद्दे कमेंट करता है। आरोपित ने अपने हाथ में लड़की के नाम का टैटू भी बनवाया है। तंग आकर लड़की ने चार अप्रैल, 2024 को पिपलानी पुलिस थाने में युवक के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अभिषेक को जेल भेज दिया था।
भोपाल की कोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया तो उसने हाई कोर्ट में जमानत आवेदन दायर किया। युवक की ओर से दलील दी गई कि बीबीए स्टूडेंट है और यदि उसे गंभीर सजा दी गई तो उसका कैरियर बर्बाद हो जाएगा। सुनवाई के दौरान आरेापित के माता-पिता भी माफी मांगते हुए हहम की गुहार लगाते रहे।
बहरहाल, सुनवाई बाद कोर्ट ने उक्त सुधारादी अनूठा आदेश सुना दिया। कोर्ट ने व्यवस्था दी कि छात्र को बेहतर नागरिक बनाने, उसकी उम्र और भविष्य को देखते हुए यह आदेश सुनाया गया है। कोर्ट ने जिला अस्पताल के सीएमएचओ को निर्देश दिए कि हैं कि वे युवक को ओपीडी में कार्य करने की अनुमति प्रदान करें।