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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में ट्राइबल शिक्षा विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत उच्च माध्यमिक, माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षकों को परिवीक्षा अवधि में 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने के मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। विस्तृत बहस के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने उमा ग्वालवंशी सहित अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन में फैसला सुरक्षित कर लिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता धीरज तिवारी ने पक्ष रखा। उनका तर्क था कि शिक्षक निर्धारित चयन प्रक्रिया और पात्रता पूरी कर नियमित स्वीकृत पदों पर नियुक्त हुए हैं।
उनसे नियमित शिक्षकों के समान कार्य और दायित्व लिए जाते हैं, लेकिन परिवीक्षा अवधि में प्रथम वर्ष 70, द्वितीय वर्ष 80 व तृतीय वर्ष 90 प्रतिशत वेतन दिया गया। इसे समान कार्य के लिए समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत बताया गया। बहस के दौरान 12 दिसंबर 2019 के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र तथा समान प्रकृति के पूर्व न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति दिनांक से 100 प्रतिशत वेतन देने के साथ रोकी गई अंतर राशि और उस पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्रदान करने की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने प्रकरण में निर्णय सुरक्षित रखा। अब फैसला आने पर प्रदेश के संबंधित शिक्षकों की वेतन व्यवस्था और बकाया राशि पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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