
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आपराधिक मामला लंबित होने या आरोपित के जमानत पर होने मात्र से उसका पासपोर्ट नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता। हाई कोर्ट ने पासपोर्ट नवीनीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में यह स्पष्ट करते हुए अधीनस्थ अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने से इनकार किया गया था।
न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने संबंधित अधीनस्थ अदालत को पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए एनओसी जारी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, विदेश यात्रा के लिए याचिकाकर्ता को संबंधित अधीनस्थ अदालत से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
मामला दमोह के व्यापारी तरनदीप सिंह होरा से जुड़ा है। उनके विरुद्ध पन्ना जिले के पवई थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज है। इस मामले में हाईकोर्ट ने उन्हें पांच अगस्त, 2025 को जमानत प्रदान की थी। इसी दौरान उनका पासपोर्ट समाप्त होने वाला था। उन्होंने पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। पासपोर्ट कार्यालय ने आपराधिक प्रकरण लंबित होने का हवाला देते हुए सक्षम न्यायालय से एनओसी प्रस्तुत करने को कहा।
याचिकाकर्ता ने इसके बाद संबंधित अधीनस्थ अदालत में एनओसी के लिए आवेदन किया, लेकिन दो सितंबर, 2026 को अदालत ने एनओसी जारी करने से इनकार कर दिया। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शुभम ठाकुर ने पक्ष रखा।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण लंबित होना अथवा उसका जमानत पर होना, अपने आप में पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। इसी आधार पर अदालत ने अधीनस्थ अदालत का आदेश निरस्त कर दिया और एनओसी जारी करने के निर्देश दिए।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का नवीनीकरण और विदेश यात्रा की अनुमति अलग-अलग पहलू हैं। एनओसी जारी होने के बाद भी यदि याचिकाकर्ता विदेश यात्रा करना चाहता है, तो उसे संबंधित अधीनस्थ अदालत से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी। इस तरह अदालत ने पासपोर्ट नवीनीकरण के अधिकार और लंबित आपराधिक प्रकरण के दौरान विदेश यात्रा की अनुमति को अलग-अलग रखते हुए आदेश पारित किया।
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