
यह आदेश रीवा निवासी अधिवक्ता सुभाष तिवारी की याचिका पर पारित किया गया। उनकी ओर से अधिवक्ता निखिल भट्ट ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ रीवा जिले के सोहागी थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था, जिसे निरस्त करने की मांग की गई।
शिकायतकर्ता महिला का आरोप था कि 31 मई, 2024 को वह अपने दोस्तों के साथ बाजार में जूस पी रही थी। इसी दौरान अधिवक्ता सुभाष तिवारी ने उसकी फोटो खींच ली और बदनाम करने की धमकी दी। हालांकि, इस घटना के करीब पांच महीने बाद 17 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज कराई गई।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि शिकायतकर्ता महिला के दादा से जुड़े एक मामले में अधिवक्ता सुभाष तिवारी विपक्षी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे हैं। इसी पेशेगत शत्रुता और व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण यह एफआईआर दर्ज करवाई गई। कोर्ट ने एफआईआर में हुई असामान्य देरी को भी गंभीरता से लिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से शब्द, इशारा, आवाज या कोई वस्तु प्रदर्शित की जाती है, तभी भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध बनता है। ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन इस प्रकरण में ऐसा कोई तत्व सामने नहीं आया।
इन तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने अधिवक्ता सुभाष तिवारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण को निरस्त करते हुए उन्हें राहत प्रदान की।