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MP High Court ने लगाई मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी पर फिलहाल रोक, अवमानना प्रकरण में कोर्ट का आदेश

यह मामला हाई कोर्ट कर्मचारियों को उच्च वेतनमान का लाभ दिए जाने संबंधी उस विवाद से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2016 में दायर याचिका से हुई थी।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 02:10:49 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 02:10:49 PM (IST)
MP High Court ने लगाई मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी पर फिलहाल रोक, अवमानना प्रकरण में कोर्ट का आदेश
28 अप्रैल, 2017 को राज्य शासन को चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। नईदुनिया

HighLights

  1. वेतनमान विवाद में राज्य शासन को अंतरिम राहत
  2. वेतनमान संबंधी प्रस्ताव वर्षों से लंबित
  3. उच्च वेतनमान का लाभ से जुड़ा मामला

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली युगलपीठ से तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च वेतनमान का लाभ दिए जाने से जुड़े बहुचर्चित अवमानना प्रकरण में राज्य सरकार को अंतरिम राहत मिली है।

न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश से फिलहाल छूट

कोर्ट ने राज्य शासन की अपील पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश से फिलहाल छूट प्रदान कर दी।

शुरुआत वर्ष 2016 में दायर याचिका से हुई थी

दरअसल, यह मामला हाई कोर्ट कर्मचारियों को उच्च वेतनमान का लाभ दिए जाने संबंधी उस विवाद से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2016 में दायर याचिका से हुई थी।

कर्मचारियों को वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहा

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वेतनमान संबंधी प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष वर्षों से लंबित है, जिसके कारण कर्मचारियों को वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने 28 अप्रैल, 2017 को राज्य शासन को चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।


वर्ष 2018 में अवमानना याचिका दायर

निर्देशों के पालन न होने पर वर्ष 2018 में अवमानना याचिका दायर की गई। प्रकरण में अपेक्षित प्रगति न होने पर एकलपीठ ने 26 मार्च, 2026 को मुख्य सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश दिए थे।

राज्य शासन ने आदेश को चुनौती देते हुए अपील प्रस्तुत

इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य शासन ने अपील प्रस्तुत की। कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ व अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा उपस्थित हुए, जबकि राज्य का पक्ष महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने रखा।

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