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एमपी के नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा मामले में एमपीएनसी रजिस्ट्रार रिकार्ड सहित तलब

पूर्व में नर्सिंग काउंसिल की ओर से लंबित परीक्षाएं कराने और परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगते हुए आवेदन पेश किया गया था।

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 09:22:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 09:33:52 PM (IST)
एमपी के नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा मामले में एमपीएनसी रजिस्ट्रार रिकार्ड सहित तलब
मध्‍य प्रदेश का नर्सिंग घोटाला।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई से कराने के निर्देश दिए थे।
  2. सीबीआई की जांच में प्रदेश के 695 नर्सिंग कालेजों में से 156 कॉलेज सूटेबल पाए गए थे।
  3. जांच के दौरान कमियों को दूर करने के बाद 89 और कालेज सूटेबल की श्रेणी में आ गए थे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को संबंधित रिकार्ड के साथ तलब किया है। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की है।

लाॅ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल के माध्यम से दायर जनहित याचिका में प्रदेश में संचालित नर्सिंग कालेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्धारित शर्तों और मापदंडों का पालन नहीं करने के बावजूद कई नर्सिंग कालेजों को कागजों पर मान्यता प्रदान की गई।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई से कराने के निर्देश दिए थे। सीबीआई की जांच में प्रदेश के 695 नर्सिंग कालेजों में से 156 कॉलेज सूटेबल पाए गए थे। जांच के दौरान पाई गई कमियों को दूर करने के बाद 89 और कालेज सूटेबल की श्रेणी में आ गए थे।


सूटेबल कॉलेजों को परीक्षा की अनुमति

पूर्व में नर्सिंग काउंसिल की ओर से लंबित परीक्षाएं कराने और परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगते हुए आवेदन पेश किया गया था। युगलपीठ ने सीबीआई जांच में सूटेबल पाए गए कालेजों में जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित कराने की अनुमति प्रदान की थी। साथ ही शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष का परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति दी गई थी।

वहीं सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाए गए कालेजों के विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित करने पर रोक बरकरार रखी गई है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का दिया हवाला

अनसूटेबल कॉलेजों की ओर से हाई कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर परीक्षा में शामिल करने और परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी गई। आवेदनों में कहा गया कि उनका मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। छात्र हित में परीक्षा में शामिल होने और परिणाम घोषित करने की अनुमति दी जाए। इसके बाद कमियां दूर कर सूटेबल श्रेणी में आए कॉलेजों की ओर से भी आवेदन प्रस्तुत कर उनके विद्यार्थियों को अन्य कालेजों में स्थानांतरित नहीं करने की मांग की गई। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।