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MPPSC भर्ती विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, कोर्ट में पेश करने होंगे फाइनल रिजल्ट, 5 कैटेगरी में होगी मामलों की सुनवाई

MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विवाद पर MP हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने सभी चयन परिणाम कोर्ट में तलब किए हैं और याचिकाओं के जल्द निपटारे के ल...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 31 Jul 2026 08:28:22 AM (IST)Updated Date: Fri, 31 Jul 2026 08:45:26 AM (IST)
MPPSC भर्ती विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, कोर्ट में पेश करने होंगे फाइनल रिजल्ट, 5 कैटेगरी में होगी मामलों की सुनवाई
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया विवाद पर सुनवाई हुई। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. MPPSC की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विवादों पर MP हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया
  2. कोर्ट ने सभी फाइनल रिजल्ट कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष तलब करने का आदेश दिया
  3. वर्षों से पेंडिंग याचिकाओं के तुरंत निपटाने के लिए हाईकोर्ट ने कुछ अहम कदम उठाए हैं

नई दुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रोसेस से जुड़े कई साल पुराने विवादों पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिटस विवेक रूसिया और जस्टिटस प्रदीप मित्तल की बेंच ने विभिन्न वर्षों में हुई चयन प्रक्रियाओं के सभी फाइनल रिजल्ट को अदालत में तलब किया है।

अदालत ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि इन सभी चयन परिणामों को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विकास शर्मा के सामने तुरंत लाया जाए।

सालों से लंबित मामलों के लिए हाईकोर्ट का नया प्लान

भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं के अंबार और लंबे समय से पेंडिंग पड़े मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए हाईकोर्ट ने एक विशेष रणनीति बनाई है। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को 5 कैटैगरी में बांटकर सुनवाई करने की योजना बनाई है-


  • जनभागीदारी अतिथि विद्वानों का विवाद
  • संबद्ध विषय (Subject Relevance) की योग्यता
  • न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्तें
  • अर्हकारी (Qualifying) परीक्षा से जुड़ी शर्तें
  • आयु सीमा में छूट से जुड़े मामले

इसके अलावा चयन प्रक्रिया से बाहर हुए या वंचित रहे अभ्यर्थियों की याचिकाओं को एक अलग श्रेणी में रखकर अलग से सुनवाई की जाएगी।

जनभागीदारी विद्वानों की मांग और सुप्रीम कोर्ट का हवाला

सुनवाई के दौरान जनभागीदारी के तहत गेस्ट फेकस्टी ने 25 % आरक्षण और 10 साल की आयु सीमा में छूट देने की मांग उठाई।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब वे समान योग्यता और समान कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें इन लाभों से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है। अपनी दलीलों के समर्थन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मशहूर 'मनीष गुप्ता मामले' के फैसले का हवाला दिया है।

दो याचिकाएं वापस ली गईं

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति भी प्रदान की। MPPSC द्वारा परिणाम जमा कराए जाने के बाद सभी श्रेणियों के मामलों पर सिलसिलेवार सुनवाई तेज होगी।

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