
नई दुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रोसेस से जुड़े कई साल पुराने विवादों पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिटस विवेक रूसिया और जस्टिटस प्रदीप मित्तल की बेंच ने विभिन्न वर्षों में हुई चयन प्रक्रियाओं के सभी फाइनल रिजल्ट को अदालत में तलब किया है।
अदालत ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि इन सभी चयन परिणामों को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विकास शर्मा के सामने तुरंत लाया जाए।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं के अंबार और लंबे समय से पेंडिंग पड़े मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए हाईकोर्ट ने एक विशेष रणनीति बनाई है। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को 5 कैटैगरी में बांटकर सुनवाई करने की योजना बनाई है-
इसके अलावा चयन प्रक्रिया से बाहर हुए या वंचित रहे अभ्यर्थियों की याचिकाओं को एक अलग श्रेणी में रखकर अलग से सुनवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान जनभागीदारी के तहत गेस्ट फेकस्टी ने 25 % आरक्षण और 10 साल की आयु सीमा में छूट देने की मांग उठाई।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब वे समान योग्यता और समान कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें इन लाभों से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है। अपनी दलीलों के समर्थन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मशहूर 'मनीष गुप्ता मामले' के फैसले का हवाला दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति भी प्रदान की। MPPSC द्वारा परिणाम जमा कराए जाने के बाद सभी श्रेणियों के मामलों पर सिलसिलेवार सुनवाई तेज होगी।
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