
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रेलवे में नौकरी हासिल करने के लिए बिहार के एक युवक ने अपने कोचिंग संचालक को परीक्षा में बैठाया। फर्जीवाड़ा कर रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर पदस्थ हो गया। पश्चिम मध्य रेल में पांच माह तक नौकरी किया। इसी दौरान बायोमेट्रिक जांच में उसकी जालसाजी उजागर हो गई। रेलवे ने घटना की सीबीआइ को जानकारी दी। इसकी भनक लगते ही मुकेश बिना बताएं नौकरी से गायब हो गया।
छानबीन में सीबीआइ को आरोपित मुकेश के बिहार में होने का पता चला। तब सीबीआइ के एक दल बिहार के मुंगेर में छापेमारी कर आरोपित मुकेश को पकड़ा। उसी से कोचिंग संचालक रंजीत कुमार का सुराग मिला। सीबीआइ दोनों आरोपित को पकड़कर जबलपुर लेकर आयी। उसके बाद न्यायालय के निर्देश पर सोमवार को आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।
रेलवे ने वर्ष 2024 में अलग-अलग पदों के लगभग आठ हजार से अधिक पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकला। इसमें टेक्नीशियन के पद के लिए मुंगेर निवासी मुकेश कुमार ने आवेदन किया। प्रारंभिक परीक्षा दिसंबर 2024 में पटना में हुई, जिसमें मुकेश की जगह पर रंजीत परीक्षार्थी बनकर शामिल हुआ।
परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत अभिलेखों के सत्यापन और मेडिकल के लिए भी रंजीत ही मुकेश बनकर उपस्थित हुआ। समस्त चरण में सफल होने के बाद 12 जुलाई, 2025 को रोजगार मेला में नियुक्ति पत्र लेने के लिए मुकेश कुमार पहुंचा। फिर इसी वर्ष सितंबर में उसकी पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत सेक्शन इंजीनियर के कार्यालय में ज्वाइनिंग हुई।
रेलवे में नियुक्ति प्राप्त करने के बाद आरोपित मुकेश अक्टूबर 2025 में प्रयागराज में विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुआ। इसके बाद वह जबलपुर रेल मंडल के अंतर्गत दमोह और सागर में पदस्थ रहा। रेलवे ने नई भर्ती वाले कर्मचारियों का एक वर्ष में पुन: बायोमेट्रिक सत्यापन होता है। जबलपुर में 14 नवंबर, 2025 को जब उसका दोबारा बायोमेट्रिक निशान लिया गया तो अंगूठे और चेहरे का मिलान नहीं हुआ। विभागीय स्तर पर संदेह जताया गया तो वह बिना बताए नौकरी से गायब हो गए। तब दो दिसंबर, 2025 को रेलवे की शिकायत पर मुकेश कुमार के विरुद्ध सीबीआइ में मामला पंजीबद्ध किया गया।
आरोपित मुकेश ने स्नातक किया है। उसे पता था कि वह रेलवे की भर्ती परीक्षा पास नहीं कर सकेगा। तब उसने पड़ोस में रहने वाले रंजीत कुमार से बातचीत की। रंजीत प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग संचालित करता था। पड़ोस में रहने के कारण दोनों की अच्छी जान-पहचान थी। रेलवे भर्ती का परीक्षा फार्म भरने के बाद मुकेश ने रंजीत को रुपयों का लालच दिया। यदि रंजीत उसके बदले परीक्षा पास कर लेता और रेलवे में नौकरी लग जाती है तो मुकेश उसे छह लाख रुपये नकद देगा। एक मुश्त मोटी राशि प्राप्त करने के लिए रंजीत साल्वर बनकर जालसाली करने तैयार हो गया। वह मेडिकल के लिए कोटा तक मुकेश की जगह पहुंचा।
आरोपितों ने जालसाजी छिपाने के लिए शातिर पैंतरा अपनाया। मुकेश और रंजीत ने मिलकर इंटरनेट के माध्यम से अपने चेहरों को मिलाकर एक फोटो बनाया। इसी फोटो को मुकेश ने रेलवे भर्ती परीक्षा के आवेदन पर चिपकाया। ताकि कोई आसानी से उन्हें पहचान न सके। न ही संदेह करें। जांच के दौरान फोटो पर संदेह जताने पर मुकेश ने यह कहकर बचने का भी प्रयास किया कि यह उसका पुराना फोटो है। पहले वह उसी तरह दिखता था। लेकिन वह ज्यादा देर तक गुमराह नहीं कर सका।
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सीबीआइ को छानबीन में पता चला है कि रंजीत कुमार पढ़ने में कुशाग्र है। वह कुछ वर्षों से मुंगेर में कोचिंग का संचालन कर रहा था। उसकी कोचिंग में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है, कई युवा पढ़ते थे। पुलिस इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं कोचिंग से रेलवे भर्ती का गिरोह तो नहीं चलता था। इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि पहले कोई और ऐसे लोगों की नियुक्ति रेलवे में हुई है क्या जो उसकी कोचिंग में पढ़ते थे।