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जबलपुर के नरेंद्र छह लोगों को दे गए जीवन दान, अहमदाबाद भेजे हार्ट और लिवर

31 अक्टूबर को सड़क दुर्घटना में घायल हुए धनवंतरि नगर निवासी नरेंद्र को 2 नवंबर को बड़ेरिया मेट्रो प्राइम मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल में डाक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 07:59:05 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 08:01:56 AM (IST)
जबलपुर के नरेंद्र छह लोगों को दे गए जीवन दान, अहमदाबाद भेजे हार्ट और लिवर
ग्रीन कारिडोर बना मेट्रो हास्पिटल से डुमना तक, हार्ट और लिवर अहमदाबाद एयरलिफ्ट किया गया।

HighLights

  1. एक किडनी मेडिकल काॅलेज जबलपुर के लिए गई
  2. कार्निया मेडिकल काॅलेज में सुरक्षित रहेगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। संस्कारधानी सोमवार और मंगलवार आधी रात को एक बार फिर दो ग्रीन कारिडोर का साक्षी बना। एक सड़क हादसे ने 40 वर्षीय नरेंद्र कुमार रजक की जिंदगी छीन ली, लेकिन उनके परिवार के एक फैसले ने छह लोगों को नया जीवन देने का रास्ता खोल दिया।

नरेंद्र ने सड़क हादसे में गंवाई थी जान

31 अक्टूबर को सड़क दुर्घटना में घायल हुए धनवंतरि नगर निवासी नरेंद्र को 2 नवंबर को बड़ेरिया मेट्रो प्राइम मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल में डाक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद स्वजनों ने अंगदान का निर्णय लिया।

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ऐसे बने ग्रीन कारिडोर

एक ग्रीन कारिडोर अस्पताल से नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज और दूसरा अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक बनाया गया। रात करीब 3 बजे शुरू हुई इस व्यवस्था के जरिए अंगों को समय पर निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने की तैयारी की गई।


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स्वजनों ने दोनों आंखें दान करने का भी निर्णय लिया

नरेंद्र का हार्ट और लिवर अहमदाबाद भेजे गए। उनकी एक किडनी मेट्रो हास्पिटल में ही जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज भेजी गई। स्वजनों ने दोनों आंखें दान करने का भी निर्णय लिया, जिन्हें मेडिकल कालेज भेजा गया। इसके अलावा नरेंद्र की त्वचा भी दान की गई है, जिसका उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा।

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इनकी भूमिका महत्वपूर्ण

इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में मेट्रो हास्पिटल के डायरेक्टर सौरभ बड़ेरिया, डा. राजीव बड़ेरिया, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा और एसडीएम मदन रघुवंशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सा संस्थानों के समन्वय से अंगदान और परिवहन की व्यवस्था पूरी की गई।

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भाई को खोने के दुख के बीच लिया अंगदान का निर्णय

नरेंद्र कुमार रजक के भाई शिवकुमार रजक ने बताया कि उनके बड़े भाई की सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मृत्यु हो गई। वह पिछले दो-तीन दिनों से ब्रेन डेड की स्थिति में थे। परिवार ने उनकी स्थिति को देखते हुए अंगदान करने का निर्णय लिया, ताकि उनके अंगों से दूसरे लोगों को जीवन मिल सके।

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शिवकुमार रजक के अनुसार, नरेंद्र कुमार रजक जबलपुर के धनवंतरि नगर क्षेत्र में रहते थे और एचसीएल कंपनी में कार्यरत थे। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन इस दुख के बीच उन्होंने अंगदान के माध्यम से दूसरों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया।

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नरेंद्र के दो बच्चे हैं

परिवार में नरेंद्र कुमार के पत्नी पूजा रजक के अलावा दो बच्चे हैं। एक बेटा 12 साल और एक बेटी अभी 8 साल की है।

अंगों के जीवित रहने और ट्रांसप्लांट की समय-सीमा

हार्ट : शरीर से निकलने के बाद हृदय को 4 से 6 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट किया जाना जरूरी होता है। समय सबसे अहम होता है।

लिवर : लिवर को निकालने के बाद आमतौर पर 8 से 12 घंटे (अधिकतम 15 घंटे) के अंदर मरीज में लगा देना चाहिए।

किडनी : किडनी सबसे लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है; इसे निकालने के बाद 24 से 36 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।

कार्निया : निकालने के बाद, उसे 7 से 14 दिनों (विशेष रूप से सुरक्षित रखने की नई तकनीकों के साथ 2 सप्ताह / 14 दिन तक) के भीतर दूसरे मरीज को लगाया जा सकता है।

जबलपुर में कब-कब ग्रीन कारिडोर बना

(अंग प्रत्यारोपण के लिए)

  • 24 जुलाई 2017: जबलपुर में पहली बार ग्रीन कारिडोर बनाया गया था। यह करीब 16 किलोमीटर लंबा था, जिसे अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक 18 मिनट में एम्बुलेंस द्वारा तय किया गया था।
  • 22 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश के इतिहास में पहला सबसे लंबा करीब 350 किलोमीटर का ग्रीन कारिडोर बनाया गया। इसके जरिए एक ब्रेन-डेड मरीज का लिवर सड़क मार्ग से रात में जबलपुर से भोपाल ले जाया गया था, जिसे 4 घंटे में पूरा किया गया।
  • 23 जनवरी 2025 : नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से दो ग्रीन कारिडोर डुमना विमानतल बनाए गए थे। यह इंदौर और भोपाल के अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बनाया गया था।
  • 7 मार्च 2025: नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती ब्रेन डेड मरीज (पूरन चौधरी) के अंगों (किडनी और त्वचा) के लिए जबलपुर में ग्रीन कारिडोर बनाया गया।
  • 10 अगस्त 2025: मेडिकल कालेज जबलपुर से अहमदाबाद और भोपाल तक अंगों को पहुंचाने के लिए ग्रीन कारिडोर बनाया गया (अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक का सफर करीब 20 मिनट में तय हुआ)।

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