जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिये नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में नियुक्तियों को विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया है। साथ ही नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। न्यायमूर्ति संजय दि्वेदी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
इस दौरान याचिकाकर्ता दीपेंद्र कुमार दुबे की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता बीई स्नातक है नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने नई नियुक्तियों के लिए विज्ञापन निकाला है। इसके जरिये महज सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ही भाग लेने के लिए पात्र किया गया है।लिहाजा, यह विज्ञापन संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 के विपरीत है। इसके जरिये अनुचित वर्गीकरण करने गलती की गई है। एक तरफ याचिकाकर्ता को संविदात्मक रोजगार प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित किया गया है,दूसरी तरफ 2017 के बाद से नियमित पद विज्ञापित नहीं किए गए हैं।उम्मीदवारों की अधिकतम आयु भी 40 वर्ष निर्धारित की गई है।
कोविड में अनाथ हुए बच्चे को घर बैठे मिल पीएफ, पेंशन का सहारा : छिंदवाडा निवासी हर्षित मिश्रा को एहसास ही नहीं था कि उसके माता-पिता के न रहने के बाद उनके पीएफ पेंशन की राशि घर बैठे ही मिल जाएगी। पीएफ के अधिकारियों के द्वारा जब उसे पीएफ पेंशन के अधिकार-पत्र सौंपे गए तो भावावेश में उसकी आंखें भर आईं। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि ईपीएफओ कोविड में मृत कर्मचारियों की पतासाजी करके उनके परिवार के सदस्यों को पीएफ पेंशन के भुगान का अभियान चला रहा है।
छिंदवाडा के आदर्श शिवम शिक्षा समिति के कर्मचारी सुनील मिश्रा व उनकी पत्नी गीता मिश्रा का कोविड बीमारी से निधन हो गया था। पीएफ ऑफिस के प्रवर्तन अधिकारी सीएल धुर्वे को इस बात की जानकारी लगी तो उन्होंने पीएफ आयुक्त राकेश सहरावत को इस बात की जानकारी दी। श्री सेहरावत ने इस पर तत्काल मृतक के बेटे से आवश्यक खानापूर्ति करते हुए क्लेम सेटलमेंट के निर्देश दिए।