
जबलपुर। जबलपुर में खुल रहे प्रदेश के दूसरे नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट को नाम मिल गया है। जबलपुर की इस यूनिवर्सिटी का धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी नाम रखा गया है। सिर्फ यही नहीं कुलसचिव के बाद कुलपति भी नियुक्त हो गए हैं। प्रोफेसर बलराज चौहान को यह जवाबदारी दी गई है। प्रोफेसर बलराज चौहान एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ कैंपस से लॉ स्कूल के निदेशक हैं। उन्हें अस्थाई तौर पर कुलपति बनाया गया है। मप्र हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार विजिलेंस की ओर से इस संबंध में आदेश जारी हो गए हैं।
अब क्या.....
धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को जुलाई से प्रारंभ करना है। न्यायविद् इसके लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं। क्लेट के जरिए प्रवेश प्रक्रिया होगी। इसलिए प्रशासनिक दायित्व तय होना जरूरी था। अब कुलपति और कुलसचिव नियुक्त हो चुके हैं। यूनिवर्सिटी का कामकाज प्रारंभ होगा।
फिलहाल अस्थाई तौर पर कुलपति की नियुक्त हुई है। कुलपति आते ही संस्थान में एकेडमिक कामकाज प्रारंभ होगा। डॉ.भीमराव आम्बेडकर दूर संचार प्रशिक्षण संस्थान में यूनिवर्सिटी प्रारंभ होगी। संस्थान के साथ करार होना बाकी है। प्रशासनिक अधिकारी इस कार्य को करेंगे। जिसके बाद अधिकारिक तौर पर प्रक्रिया होगी।
नाम को धार्मिकता से न जोड़कर देखें
नव नियुक्त कुलपति प्रो.बलराज चौहान ने कुलपति बनना गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय विधि व्यवस्था को बेहतर करने में धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी अपना अहम योगदान देने का प्रयास करेगी। इसे देश में अलग पहचान दिलाने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि इसके नाम को धार्मिकता से जोड़कर नहीं देखा जाए। धर्मशास्त्र का मतलब सनातन धारण करने वाला है। प्रो.बलराज के मुताबिक वह अगले एक हफ्ते में जबलपुर आकर कार्यभार ग्रहण करने का प्रयास करेंगे। उनकी प्राथमिकता अगस्त से यूनिवर्सिटी का सत्र प्रारंभ करना होगा।
हाईकोर्ट के अधीन यूनिवर्सिटी
मप्र हाईकोर्ट की ओर से कुलपति और कुलसचिव की नियुक्ति की जा रही है। जानकारों के अनुसार मप्र हाईकोर्ट की निगरानी में यूनिवर्सिटी का संचालन होगा।
कौन हैं बलराज
प्रोफेसर बलराज चौहान एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ कैंपस से लॉ स्कूल के निदेशक हैं। इससे पूर्व डॉ.राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ और एनएलआईयू भोपाल के कुलपति के रूप में कार्य किया है। वह उत्तर प्रदेश राज्य कानून आयोग, यूपी राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के सदस्य और कार्यकारी सदस्य शास्त्री इंडो कैंडियन इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के सदस्य भी रहे हैं। प्रोफेसर चौहान की विशेष रुचि आपराधिक कानून, अपराध विज्ञान और नैदानिक कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में है।
क्रिमिनोलॉजी पर मिला सम्मान
प्रो.चौहान को 2009 में क्रिमिनोलॉजी के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. कुमारप्पा रेकलेस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। लखनऊ और अन्य विश्वविद्यालयों के साथ पिछले 16 वर्षों से शिक्षण और अनुसंधान अनुभव के तीस से अधिक वर्षों के प्रोफेसर के रूप में सेवा दे रहे है। वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी और फोरेंसिक साइंस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, इटली, युगांडा और फिलीपींस, कनाडा में विभिन्न् विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण कर चुके हैं।