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एनसीएल की सहायक फोरमैन भर्ती निरस्त करने को हाई कोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की सहायक फोरमैन (प्रशिक्षु) ग्रेड-सी भर्ती परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

By Surendra DubeyEdited By: manoj dubey
Publish Date: Mon, 02 Nov 2026 09:14:49 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Nov 2026 09:14:49 PM (IST)
एनसीएल की सहायक फोरमैन भर्ती निरस्त करने को हाई कोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

HighLights

  1. 270 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था
  2. पुनः परीक्षा कराने का आदेश जारी कर दिया
  3. दागी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करके कार्रवाई हो

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की सहायक फोरमैन (प्रशिक्षु) ग्रेड-सी भर्ती परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एनसीएल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

साथ ही अंतरिम राहत के संबंध में भी दो सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

270 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था

मामला याचिकाकर्ता विवेक कुमार तिवारी सहित अन्य विरुद्ध एनसीएल व अन्य से संबंधित है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व अधिवक्ता काजल विश्वकर्मा ने पक्ष रखा।याचिका के अनुसार एनसीएल ने नौ फरवरी, 2026 को इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल एवं ईएंडटी संवर्ग में 270 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था।


पुनः परीक्षा कराने का आदेश जारी कर दिया

आठ अगस्त को परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, जिसमें याचिकाकर्ताओं का चयन कर दस्तावेज सत्यापन के लिए सूचीबद्ध किया गया। हालांकि, कुछ परीक्षा केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 13 अगस्त को दस्तावेज सत्यापन स्थगित कर दिया गया।

इसके बाद 10 अक्टूबर 2026 को एनसीएल ने पूरी चयन परीक्षा निरस्त कर पुनः परीक्षा कराने का आदेश जारी कर दिया।

निर्दोष और सफल अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि एनसीएल ने अपने आदेश में स्वयं स्वीकार किया है कि अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान कर ली गई है। ऐसे में दोषी अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने के बजाय पूरी परीक्षा निरस्त करना निर्दोष और सफल अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।

दागी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करके कार्रवाई हो

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 एवं 21 व सर्वोच्च न्यायालय के सचिन कुमार और वंशिका यादव प्रकरणों में प्रतिपादित सिद्धांतों का हवाला दिया गया है। तर्क दिया गया कि दागी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करके कार्रवाई की जानी चाहिए।

पूरी परीक्षा निरस्त करना अनुपातहीन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। बिहार, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड और तेलंगाना के सात अभ्यर्थियों ने आरपीएस ला एसोसिएट्स के माध्यम से संयुक्त याचिका दायर की है।

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