
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट की नई वेबसाइट की तकनीकी खामियां अब न्यायिक कामकाज में बाधा बनने लगी हैं। ई-हियरिंग के दौरान वेबसाइट के ठीक से काम नहीं करने और बार-बार बफरिंग व हैंग होने की समस्या पर हाई कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायामूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की पीठ ने आदेश में कहा कि वेबसाइट की गड़बड़ियों के कारण कोर्ट का न्यायिक समय बर्बाद हुआ है।
कोर्ट ने हाई कोर्ट के आईटी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए मुख्य न्यायाधीश से संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई पर विचार करने को कहा है। रजिस्ट्रार (आईटी-सीएसए) केएस कुशवाहा को विस्तृत जांच कर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि वेबसाइट के कारण हाई कोर्ट के कामकाज में बाधा क्यों उत्पन्न हो रही है। दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की रिपोर्ट सात दिन में पीठ के समक्ष पेश करनी होगी।
कोर्ट ने मामले को केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रखा। हाई कोर्ट के पूरे आईटी सिस्टम के स्वतंत्र परीक्षण के लिए टीसीएस, इंफोसिस या एलएंडटी टेक्नोलाजी सर्विसेज जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। टीम में केंद्र सरकार के सी-डाट और मासकाम के अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है। स्वतंत्र आडिट 30 दिन में पूरा कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने नई वेबसाइट के ठीक से काम नहीं करने की शिकायत की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुरानी वेबसाइट अपेक्षाकृत बेहतर काम करती थी। इसके बाद रजिस्ट्रार कुशवाहा की मौजूदगी में सिस्टम की जांच की गई। जांच के दौरान भी वेबसाइट में बफरिंग और हैंग होने जैसी कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं।
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