
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के शिक्षाविद आनलाइन पढ़ाई के फायदे व नुकसान, दोनों के प्रति जागरुक रहने की सीख दे रहे हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट माध्यम के साइड इफेक्ट की कम नहीं हैं। लिहाजा, बच्चों व युवाओं को इनसे बचाना होगा। मोबाइल हाथ में देने के बाद उनकी आंखों व दिमाग की देखभाल आवश्यक है। अत्यधिक उपयोग ही दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। डॉ.अनुराग तिवारी का कहना है कि कोविड काल में अभिभावकों ने बच्चों को स्मार्ट मोबाइल से लैस कर दिया।
इंटरनेट की सुविधा भी दे दी है। अब बच्चे व युवा कितनी पढ़ाई कर रहे हैं और कितनी मस्ती, यह सवाल दरकिनार कर दिया गया है। बच्चे व युवा पढ़ाई का प्रतिशत 50 से ऊपर रखें तो ठीक लेकिन यदि 80 फीसद मस्ती और महज 20 फीसद पढ़ाई हो रही है, तो यह नुकसानदायक है। सिर्फ गेम खेलने या अन्य तरह की साइट सर्च करने में इंटरनेट डाटा काे खर्च करना समझदारी नहीं है।
इससे धन के साथ सेहत व समय की भी बर्बादी होती है। डॉ. विजय शुक्ला का कहना है कि शिक्षा का दौर बेहद संवेदनशील दौर होता है। इस समय यदि बच्चे व युवा को सही दिशा न मिले तो भटकाव आसान होता है। इंटरनेट इस दिशा में बड़ी आसानी से धकेल देता है। विशेषकर एप्स के जरिये जितना फायदा हो सकता है, उससे अधिक नुकसान भी मुमकिन है। आजकल सायबर ठगी का दौर है। ऐसे में बच्चे व युवा ठगों के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में ब्लैकमेलिंग शुरू हो जाती है। मांग पूरी करने के लिए बच्चे व युवा क्राइम की ओर चले जाते हैं।