
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिले में सामान्य सर्दी, खांसी और फेफड़ों के संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को स्वाइन फ्लू का खौफ दिखाकर निजी अस्पतालों द्वारा मनमाने इलाज और अवैध वसूली की लगातार आ रही शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी के अनुसार जिले में स्वाइन फ्लू की आशंका पर करीब 24 संदिग्ध लोगों की पड़ताल कराई गई थी, जिनमें निजी नर्सिंग होम से रेफर होकर आए मरीज भी शामिल थे।
विभाग ने इन सभी 24 व्यक्तियों के नमूने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजे थे, जहां जांच के बाद प्रत्येक व्यक्ति का परीक्षण पूरी तरह निगेटिव निकला। सीएमएचओ ने साफ कर दिया कि किसी भी निजी अस्पताल अथवा लैब को इस संक्रामक बीमारी की पुष्टि करने की कानूनी मान्यता नहीं है।
लोगों को मौसमी बीमारियों की आड़ में भ्रमित करने वाले संस्थानों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। निर्धारित स्वास्थ्य गाइडलाइन के तहत यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं, तो संबंधित चिकित्सक अथवा नर्सिंग होम प्रबंधन को सबसे पहले जिला स्वास्थ्य कार्यालय को सूचना देना अनिवार्य होता है।
इस औपचारिक सूचना के बाद सरकारी निगरानी तंत्र ही उस पीड़ित का नमूना सुरक्षित विधि से एकत्र करता है। इसके उपरांत ही वह सैंपल आईसीएमआर द्वारा पंजीकृत आधिकारिक प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजा जाता है। ऐसे स्पष्ट सरकारी प्रोटोकॉल के बावजूद कुछ नर्सिंग होम अपने स्तर पर जांच कर लोगों को पॉजिटिव बता रहे थे, जो कि कानून के विरुद्ध है।
शहर में एक भी मरीज प्रमाणित न मिलने से यह साबित हो गया है कि जिले में कोई गंभीर संक्रमण नहीं फैला है। विभाग ने आम जनता को भरोसा दिलाया है कि वे घबराहट में आकर महंगे टेस्ट न कराएं। स्वास्थ्य अमला ऐसे गैर-जिम्मेदार संस्थानों की निरंतर पड़ताल कर रहा है ताकि मरीजों से अनुचित धन उगाही रोकी जा सके। लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल सरकारी तंत्र से जारी प्रमाणित रिपोर्ट पर ही भरोसा रखें और भयभीत हुए बिना सामान्य डॉक्टरी सलाह लें। नियम विरुद्ध काम करने वाले संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई तय की जा रही है।