नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। ट्रेनों में लंबी वेटिंग से राहत देने के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों को चलाया। इतना ही नहीं इनमें सफर करने वाले यात्रियों को स्पेशल फेयर भी वसूला, लेकिन न तो स्पेशल ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेलवे लगाम लगा सका और न ही उनकी रफ्तार बढ़ा पाया। इसका असर यह हुआ कि नियमित ट्रेनों की तुलना में 70 से 80 फीसदी स्पेशल ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं।
स्पेशल ट्रेन के नाम पर यात्रियों से ठगी
जिन क्षेत्रों से यात्री ट्रेनों को चलाने की मांग आई, वहां स्पेशल ट्रेनों को चला दिया गया।
खुद को ठगा महसूस कर रहे यात्री
15 से 20 फीसदी तक अतिरिक्त किराया देकर स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले यात्री, खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। हकीकत यह है कि जबलपुर समेत भोपाल और कोटा मंडल में नियमित ट्रेनों काे समय पर चलाने के लिए स्पेशल ट्रेनों को देरी से चलाया जा रहा है। इन ट्रेनों को कहीं भी कभी भी खड़ा कर दिया जा रहा है। इतना ही नहीं इन ट्रेनों की पंचुल्टी 50 फीसदी से नीचे पहुंच गई है। यही वजह है कि यात्री, हर हाल में नियमित ट्रेनों में ही आरक्षण कराने पर जोर देता है, फिर भले ही इसके लिए उसे तत्काल या प्रीमियम किराया देना हो।
ऑपरेटिंग विभाग की अनदेखी
नियमित ट्रेनों को समय दौड़ाने के लिए जबलपुर मंडल ही नहीं बल्कि भोपाल और कोटा मंडल हर संभव कदम उठा रहा है, लेकिन इस बीच वह तीनों मंडल से रवाना होने वाली स्पेशल ट्रेन हो या फिर यहां से गुजरने वाली स्पेशल ट्रेन, दोनों को समय पर नहीं चला पा रहा। इन ट्रेनों को स्टेशन के आउटर पर घंटों खड़ा कर दिया जाता है। इस वजह से यह ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 22 से 24 घंटे तक देरी से चल रही हैं।
23 से 24 घंटे तक देरी
जबलपुर से गुजरने वाली ट्रेन 03418 मलदा टाउन स्पेशल ट्रेन 23 से 24 घंटे तक देरी से चल रही है। इधर यही हाल ट्रेन 01666 कर है। यह ट्रेन भी अपने निर्धारित समय से 11 घंटे देरी से चल रही है। यही वजह है कि गंतव्य तक पहुंचते-पहुंचते यात्री इतना परेशान हो रहा है कि वह स्पेशल ट्रेनों में बैठने से अब परहेज करने लगा है। इसी वजह से इन ट्रेनों की सीट खाली जा रही है।
स्पेशल ट्रेनों का हाल