
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। वृंदावन में जहां एक तरफ साधक रसिकदुलारी शरण की चिता जल रही थी वहीं दूसरी ओर उनकी मां का दिल रो रहा था, जिसे जन्म दिया उसकी ही चिता जलते देख मां का कलेजा मुंह को आ रहा था। वे बस यही बोलती रहीं कि मेरा लाल सेना में जाना चाहता था।
आगे बोलीं कि पढ़ाई में अच्छा था लेकिन किसी कारण से फिजिकल नहीं निकाल पाया तो धर्म के रास्ते पर चल पड़ा। इसी बीच वृंदावन वाले प्रमा महाराज के वीडियो देखकर उनका अनुयायी बनने की ठान ली। दो साल पहले वृंदावन गया था, फिर उसका चेहरा तक नहीं देख पाए। करीब 11 बार उससे मिलने गए लेकिन आश्रम में घुसने नहीं दिया। एक बार भी अपने लाला को नहीं देख पाई। अब उसकी लाश मिली है।
संत प्रेमानंद के शिष्य द्वारा चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने के मामले में संतों ने अपनी चुप्पी तोड़ी। संतों की बैठक में शिष्य रसिकदुलारी शरण की संदिग्ध मृत्यु की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई गई। आरोप लगाया गया कि संत प्रेमानंद के शिष्य श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता करते हैं।
परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज में महामंडलेश्वर राधाप्रसाददेव की अध्यक्षता में हुई बैठक में साधक रसिकदुलारी शरण की मृत्यु को लेकर कई सवाल खड़े किए गए। महंत मोहिनी बिहारी शरण ने कहा कि संत प्रेमानंद के आश्रम में बड़ी संख्या में दीक्षित साधक और साधिकाएं रहते हैं।
महंत मोहिनी बिहारी शरण ने कहा कि आश्रम परिसर से अप्रिय घटनाओं की सूचना अक्सर आती है, और रसिकदुलारी शरण की संदिग्ध मृत्यु ने इस पर और सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने घटना के कारणों की उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव ने कहा कि वृंदावन में हजारों संत रहते हैं, लेकिन प्रशासन का ध्यान अपेक्षित नहीं है। इससे अपराधी प्रवृत्ति के लोग साधु का चोला धारण कर निवास कर रहे हैं।
बैठक में श्रीदास प्रजापति, राजेश शास्त्री, हरियानंद सरस्वती, मूलचंद गिरी, सेवादास, सतीश गिरी, चंदन महाराज, हरीगिरी, अंकित शास्त्री, पुरुषोत्तम, अभिलाख, अक्षत, सूरज और कृष्ण दास भी उपस्थित थे।
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