
नईदुनिया, जबलपुर(Jabalpur Industry Conclave)। मध्यप्रदेश में अभी तक प्रदेश स्तर की ही इंवेस्टर मीट हुआ करती थी, लेकिन अब संभागीय स्तर की रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की शुरुआत की गई है। इस पहला आयोजन उज्जैन में हुआ और अब 20 जुलाई को जबलपुर में होने जा रहा है। इस दौरान संभाग में औद्योगिक निवेश को गति देकर बड़े निवेश की नींव रखी जाएगी।
सिंधी धर्मशाल में- मंत्रीगण, सांसद, विधाय के वाहन पार्क होंगे
मुख्य आयोजन स्थल में- वरिष्ठ अधिकारी और अंतराष्ट्रीय प्रतिनिधि
पीली कोठी- मीडिया एवं दो पहिया वाहन
क्राइस्ट चर्चआइसीएसई- जिला स्तरीय अधिकारी
क्राइस्ट चर्च प्राइमरी- सभी प्रतिनिधि
होम गार्ड ग्राउंड- अतिरिक्त वाहन
पालिटेक्निक कालेज- पुलिस वाहन
इस रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव के बाद 7 और 8 फरवरी 2025 को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश की नई निर्यात नीति की घोषणा होगी और निवेश बढ़ाने के लिए नये निवेशकों के साथ नई उद्योग नीति में किए गए प्रविधानों को सांझा किया जाएगा। इसके बाद सितंबर में ग्वालियर और अक्टूबर में रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है। वहीं तमिलनाडु के कोयंबटूर में 25 जुलाई को, कर्नाटक के बेंगलुरु में अगस्त में, दिल्ली में सितंबर और इंदौर में सितंबर में भी प्रस्तावित है।
शनिवार सुबह 9 बजे से संस्कारधानी में हो रहे दूसरे रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 80 करोड़ रूपये की लागत से नवनिर्मित “नेताजी सुभाष चंद्र बोस सांस्कृतिक और सूचना केंद्र का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद यहां होने वाले क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन का भी शुभारंभ करेंगे। सम्मेलन में प्रमुख उद्योगपतियों, विभिन्न उद्योग संघों के प्रतिनिधियों और प्रमुख विदेशी प्रतिनिधियों सहित 3500 से अधिक उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियाँ शामिल होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 60 से अधिक इकाईयों का वर्चुअली उद्घाटन कर उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे।
रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में शामिल होने वाली हस्तियों में बैद्यनाथ समूह, आईटीसी, वोल्वो आयशर, बेस्ट कॉर्प, एसआरएफ एवं दावत समूह जैसे प्रमुख औद्योगिक समूह भाग लेंगे। आरआईसी में ताईवान, मलेशिया, ब्रिटेन, फिजी, जापान और इंडोनेशिया का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख विदेशी प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव में एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के साथ छिंदवाड़ा और जबलपुर सहित अन्य क्षेत्रों के उद्योगपति भाग ले रहे हैं।
- बैद्यनाथ समूह
- आईटीसी
- वोल्वो आयशर
- बेस्ट कॉर्प
- दावत समूह
जबलपुर समेत महाकौशल में कृषि की असीमित संभावना है। यहां के धान और गेहूं की मांग न सिर्फ व्यापारी, बल्कि बड़े ब्रांड के आटा और चावल बेचने वाली कंपनियों के बीच है। इसके साथ ही जबलपुर मटर उत्पादन में देश में दूसरे नंबर पर है। इसकी मांग देश और विदेश में तेजी से बढ़ी है। वहीं मक्का और सोयाबनी की बढ़ता उत्पादन अौर गुणवत्ता से भरी फसल बड़ी-बड़ी कंपनियों का ध्यान जबलपुर की ओर आकर्षिक कर रही हैं।
भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति नगर की चार प्रमुख आर्डनेंस फैक्ट्री में उत्पादन के बाद होती है। देश की सबसे पुरानी व सबसे बड़ी फैक्ट्रियों में शुमार आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया, वाहन निर्माणी जबलपुर, आर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर और तोपगाड़ी निर्माणी की ख्याति देश दुनिया तक है। यहां बने उत्पाद की गुणवत्ता की साख आज भी कायम है। रक्षा क्षेत्र की इन फैक्ट्ररियों के पास वर्तमान में काम की कमी है। अपार संभावना से भरे आयुध क्षेत्र की तरफ खास ध्यान दिया गया तो जहां नौजवानों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा वहीं बेहतर उत्पादन संभव हो सकेगा।
जबलपुर समेत पूरा महाकौशल कई खनिजों से संपन्न है। जिले में आयरन, एल्यूमीनियम (बाक्साइट), कॉपर, डोलोमाइट, सिलिका सेंड, चूना पत्थर जैसे कुछ प्रमुख खनिज पाए जाते हैं। जबलपुर एवं कटनी जिले के 563 वर्ग किमी क्षेत्रफल में एनएमडीसी के द्वारा सोना, निकिल, हीरा, लेड, कॉपर और एल्युमीनियम खनिज का सर्वेक्षण एवं पूर्वेक्षण का काम शुरू किया गया है। खनिज की अपार संभावनाएं निवेशक को रिझाएंगी।
जबलपुर में रेडिमेट गारमेंट की छोटी एवं बड़ी मिलाकर 1500 ईकाईयां हैं। इसके अलावा गारमेंट क्लस्टर में भी 200 ईकाई कार्य कर रही हैं, जहां जींस से लेकर सुंदर परिधान तैयार होते हैं। जबलपुर में गारमेंट के कुशल कारीगर सस्ती मजदूरी पर उपलब्ध हैं। वहीं यहां के गारमेंट की मांग कर्नाटक, तमिलनाडु, आंधप्रदेश, केरल, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल में है। यहां पर निवेशक आते हैं तो उनके लिए यहां गारमेंट सेक्टर में अपार संभावना हैं। इसके साथ होजरी सेक्टर में भी निवेश की संभावना बढ़ी है।
जबलपुर न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश का भी दिल है। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना टाइगर रिजर्व तक पहुंचने का जबलपुर मुख्य शहर है। जो इन जगह को रेल, सड़क और वायु मार्ग से जोड़ता है। ज्यादातर विदेशी पर्यटक यहां समय बिताए बगैर कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच राष्ट्रीय उद्यान समेत अन्य पर्यटन स्थल के लिए रवाना हो जाते हैं। इसके अलावा भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियां, नर्मदा के सुंदर घाट से लेकर जबलपुर के आसपास फैली हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटन क्षेत्र में निवेश की यहां असीम संभावनाएं हैं।
उद्योग संघों, स्टार्टअप एवं रक्षा, कपड़ा एवं परिधान के विशेषज्ञों के साथ राउण्ड- टेबल चर्चा भी होगी। निवेशकों को महाकौशल का अनुभव प्रदान करने के लिए जबलपुर एक्सपो और रक्षा प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक कार्यक्रम और नेटवर्किंग डिनर के साथ होगा, जिसमें क्षेत्र की संस्कृति और व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा।