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एमपी में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण पर फिर ब्रेक, अब अगली सुनवाई 18 अगस्‍त को

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि 2025 के नए प्रमोशन नियम लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में कोई अनुमति या आवेदन दिया गया था या नहीं। र...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 03 Aug 2026 08:03:18 PM (IST)Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 08:09:47 PM (IST)
एमपी में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण पर फिर ब्रेक, अब अगली सुनवाई 18 अगस्‍त को
मध्‍य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी पर टिकी सुनवाई।
  2. 2025 के नए नियमों को लेकर उठे सवाल।
  3. 18 अगस्त को होगी इसकी अगली सुनवाई।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका के कारण हाई कोर्ट में आगे नहीं बढ़ सका। सोमवार को करीब एक घंटे चली बहस के बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका यानि एसएलपी पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही रिट अपील पर आगे सुनवाई करना उचित होगा। दोनों पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त आवेदन देकर एसएलपी की जल्द सुनवाई कराने का प्रयास करेंगे।


सुनवाई शुरू होने से पहले न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने बताया कि सीपी माथुर प्रकरण में वे पूर्व में याचिकाकर्ताओं की ओर से केंद्रीय व राज्य प्रशासनिक अधिकरण, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में पैरवी कर चुके हैं। इस पर राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं से राय ली गई। दोनों पक्षों ने कोई आपत्ति नहीं जताई और पीठ पर भरोसा व्यक्त किया।

2025 के प्रमोशन नियमों पर सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि 2025 के नए प्रमोशन नियम लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में कोई अनुमति या आवेदन दिया गया था या नहीं। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने बताया कि कई राज्यों से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि 2025 के नियमों की प्रस्तावना में एसएलपी 13954/2016 का उल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2016 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। ऐसे में अंतिम फैसला भविष्य की पदोन्नतियों पर भी असर डालेगा।

सामान्य वर्ग की दलील

सामान्य वर्ग की ओर से कहा गया कि कई विभागों में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व पहले ही पूरा है, फिर भी प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है। मेरिट से चयनित आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन में दोबारा आरक्षित सूची में शामिल करने पर भी आपत्ति जताई गई। सुनवाई में एम. नागराज और जरनैल सिंह के फैसलों का भी उल्लेख हुआ।

अब आगे क्या होगा

18 अगस्त को दोनों पक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग से जुड़ेंगे और सुप्रीम कोर्ट में दायर किए जाने वाले आवेदन की प्रगति बताएंगे। इसके बाद हाई कोर्ट मामले की मेरिट पर सुनवाई की अगली तारीख तय करेगा।