जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सावन शिव भक्ति के लिए विशेष महीना है। इस माह शिवाभिषेक सहित रुद्री निर्माण से भोले अपने भक्‍तों को विशेष कृपा प्रदान करते हैं। शिव को प्रसन्‍न करने और मनोकामना को लेकर भक्‍तों को सावन महीने का विशेष रूप से इंतजार होता है। इस माह शिव पूजन से विशेष रूप से समृद्धि की प्राप्ति होती है।

25 जुलाई से शुरू 22 अगस्‍त को समापन : ज्‍योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि 25 जुलाई से शुरू हो रहे भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास का आरंभ श्रवण नक्षत्र से हो रहा है। इस दिन दोपहर बाद 2 बजकर 57 मिनट तक आयुष्यमान योग है। यह योग रोगों से छुटकारा दिलाने के साथ ही दीर्घ आयु प्रदान कराएगा। श्रावण मास का समापन 22 अगस्त को धनिष्ठा नक्षत्र में होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।

इस दिन करें विशेष पूजन : शिव का पूजन विशेष रूप से सोमवार को किया जाता है। जिस दिन प्रदोष सोमवार के दिन होता है वह सोम प्रदोष कहलाता है। भगवान के पूजन विशेष रूप से शमी पत्र, विल्‍प पत्र और दूध, दही और शहद का उपयोग किया जाता है। भगवान ऊं नम: शिवाय के मंत्र से जल्‍द प्रसन्‍न होते हैं। श्रावण मास में आशुतोष भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास में जो प्रत्येक दिन पूजन ना कर सके, उन्हें सोमवार को शिव पूजा अवश्य करनी चाहिए। सोमवार को व्रत रखकर शिव आराधना, अभिषेक एवं शिव का विशेष पूजन करने से मनोकामना की पूर्ति होती है।

-26 जुलाई पहला सोमवार- घ‌निष्ठा नक्षत्र, सौभाग्य योग, वणिजकरण।

-2 अगस्त दूसरा सोमवार- नवमी तिथ‌ि, कृतिका नक्षत्र, गर करण व सर्वार्थ सिद्धि योग।

-9 अगस्त तीसरा सोमवार- अश्लेषा नक्षत्र, वरियान योग, गर करण, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा।

-16 अगस्त- चौथा सोमवार- अनुराधा नक्षत्र, ब्रह्म योग, सर्वार्थ सिद्धि योग।

Posted By: Brajesh Shukla

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