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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 10, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP High Court: सिवनी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, हाई कोर्ट के आदेश पर रोक

मप्र हाई कोर्ट ने हड़ताल पर जाने के रवैये को आड़े हाथों लेकर सिवनी बार के 11 पदाधिकारियों को तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दे दिया था। यही नह...और पढ़ें

By Neeraj PandeyEdited By: Neeraj Pandey
Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 11:43:08 PM (IST)Updated Date: Wed, 10 Apr 2024 11:43:08 PM (IST)
MP High Court: सिवनी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, हाई कोर्ट के आदेश पर रोक
सिवनी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

HighLights

  1. सिवनी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
  2. सुको ने लगाया हाई कोर्ट के आदेश पर रोक
  3. 11 पदाधिकारियों को तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य करार देने का मामला

जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सुप्रीम कोर्ट ने सिवनी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों निलंबन संबंधी हाई कोर्ट के पूर्व अदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही बार कोंसिल आफ इंडिया, एमपी स्टेट बार कोंसिल व रजिस्ट्रार जनरल, हाई कोर्ट को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान विशेष अनुमति याचिकाकर्ताओं सिवनी बार के पदाधिकारियों की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता, शैलेंद्र वर्मा व मृगांक प्रभाकर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाई कोर्ट ने हड़ताल पर जाने के रवैये को आड़े हाथों लेकर सिवनी बार के 11 पदाधिकारियों को तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दे दिया था। यही नहीं अदालत में पैरवी भी प्रतिबंधित कर दी थी।


वस्तुस्थिति यह है कि सिवनी न्यायालय को स्थानांतरित करने के विरुद्ध वर्ष 2021 से मुहिम चलाई जा रही है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि कुमार गोल्हानी व सचिव रितेश आहुजा ‌द्वारा पूर्व में हाई कोर्ट को प्रतिवेदन देकर कहा गया था कि वर्तमान में स्थित जिला न्यायालय की बिल्डिंग को अन्य जगह स्थानांतरित करने के स्थान पर उससे लगी हुई छह एकड़ रिक्त भूमि को आवंटित कर विकसित किया जा सकता है। मांग पूरी न होने पर हड़ताल की गई थी।