
विशेष संवाददाता,नईदिल्ली। पदोन्नति में आरक्षण मामले को लेकर प्रदेश की गर्माई राजनीति के बीच सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति रखने का आदेश देकर मप्र सरकार को फिलहाल एक बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि इस मामले में जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं होता है, तब तक इस आधार पर न तो किसी को पदोन्नति दी जाए और न ही किसी की पदोन्नति छीनी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश राज्य सरकार की उस याचिका पर दिया है, जिसमें मप्र हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को गलत बताया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को इस मामले सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले उस सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई अब सितंबर में होगी। जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस एए सप्रे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी पक्षों से अगली सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस केस को राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते ही दाखिल कर दिया था।
बता दें कि मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने पिछले दिनों पदोन्नाति में आरक्षण को गलत बताते हुए इसे वापस लेने का आदेश देकर मप्र के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में हलचल मचा दी थी। हालत यह थी, कि संसद तक यह मामला उठा। इस मामले में कांग्रेस ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा किया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया था।