सुरेंद्र दुबे, जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के व्यस्ततम व्यापारिक क्षेत्र कमानिया गेट के समीप स्थित बड़कुल प्रतिष्ठान खोवे की जलेबी के लिए सुप्रसिद्ध है। यहां पिछले 133 वर्ष से शुद्ध से निर्मित खोवे की जलेबी की मिठास कायम है। सबसे खास बात यह है कि यह जलेबी एक-दो नहीं बल्कि पूरे आठ दिनों तक खराब नहीं होगी। यही वजह है कि इसे स्थानीय स्तर पर जबलपुर और आसपास ही नहीं बल्कि समूचे महाकोशल व मध्य प्रदेश में पसंद किया जाता है। मुंबई, दिल्ली, पूना ही नहीं दुबई तक में इसके स्वाद के दीवानों की कमी नहीं है। समय के साथ संचालकों ने आर्डर के मुताबिक डिलेवरी की सुविधा शुरू कर दी है।लिहाजा, आर्डर आते ही खोवे की जलेबी पैक करके मुकाम की तरफ रवाना कर दी जाती है। शुद्ध घी, तेंकुर व खोवे से बनी होने के कारण खाेवे की जलेबी फराहारी खाद्य सामग्री में शुमार की जाती है। इसलिए उपवास के समय भी इसे पसंद किया जाता है।

नवरात्र सहित अन्य त्योहारों के समय दो से तीन गुनी हो जाती है मांग :

संचालक मनीष जैन व चंद्रप्रकाश जैन बताते हैं कि वे इस प्रतिष्ठान की तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं। हमारे प्रतिष्ठान में रोज 25 से 30 किलो खोवे की जलेबी बिक जाती है। नवरात्र सहित अन्य त्योहारों के समय मांग दो से तीन गुनी हो जाती है।वर्तमान में 440 रुपये में एक किलो शुद्ध घी से बनी खोवे की जलेबी हासिल की जा सकती है।तकनीकी प्रगति के साथ इस प्रतिष्ठान ने खोवे की जलेबी को दूर-दराज तक पहुंचाने वाट्सएप पर आर्डर स्वीकार करने की तरीका अपनाया है। इससे व्यापार में बढ़ोत्तरी हुई है।

हरप्रसाद बड़कुल ने 1889 में दमोह हटा से जबलपुर आकर पहले खोमचा लगाया फिर झोपड़ी बनाई :

मनीष व चंद्रप्रकाश बताते हैं, हमारे दादा हर प्रसाद बड़कुल 1889 में दमोह हटा से जबलपुर आए थे। पहले-पहल उन्होंने कमानिया गेट के पास एक खोमचा लगाया। उसी के जरिये खोवे की जलेबी बेचते थे। आगे चलकर 1916 में उसी जगह पर पिता मोतीलाल बड़कुल द्वारा झोपड़ी बनाकर दुकान संचालित की जाने लगी। अंतत: 1956 में आर्थिक हालत संवरी तो खोमचे व झोपड़ी वाली जगह पर आलीशान प्रतिष्ठान निर्मित कर लिया गया। आज यह प्रतिष्ठान जबलपुर के बाजार की शान बनकर खड़ा है। यहां हर वक्त शुद्ध घी की महज महसूस की जा सकती है। यहां शुरूआत से खोवे की जलेबी के साथ सिंघाड़ा पाक व सिंघाड़ा सेव मूंगफली साथ में बेचे जाने की परम्परा रही है। यहां शुद्ध घी की पुड़ी सहित अन्य सभी सामग्री में शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है। यही वजह है कि जिसकी जीभ को एक बाद स्वाद लगा, वह बार-बार खिंचा चला आता है।

अटल बिहारी बाजपेयी सहित कई बड़ी हस्तियों को खूब भाया स्वाद :

बड़कुल की खोवे की जलेबी का स्वाद प्राधनमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से लेकर शरद यादव, मीरा कुमार, विद्याचरण शुक्ल, श्यामाचरण शुक्ल, बाबूराव परांजपे, शैल चतुर्वेदी, आदेश श्रीवास्तव,डा.झुनझुनवाला को खूब भाया था। जबलपुर के पंडित बनारसीदास भनोत से लेकर वर्तमान पीढ़ी में विधायक तरुण भनोत व उसने बच्चों तक को बड़कुल की खोवे की जलेबी बेहद पसंद है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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