जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर भर में आतंक का पर्याय बन रहे आवारा श्वानों की बढ़ती तादात पर अंकुश लगाने नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है। श्वानों के बधियाकरण अभियान के नाम पर नगर निगम ने पिछले 11 वर्षों में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा राशि खर्च कर दी गई। बावजूद इसके श्वानों की संख्या कम नहीं हुई।
उल्टा इनकी तादात साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है। शहर की हर गली, मोहल्ला, कालोनियों में आवारा श्वान आतंक मचा रहे हैं। कई क्षेत्रों में तो श्वान इतने खूंखार हो चुके हैं कि राह चलते लोगों का दौड़ाकर , काट कर घायल भी कर रहे हैं। शहर मध्य स्थित सिविक सेंटर जेडीए पार्क के समीप श्वानों का झुंड देखकर तो रात में लोग इस रास्ते से निकलने की हिम्मत तक नहीं करते।
बधियाकरण अभियान पर भी उठ रहे सवाल: नगर निगम पिछले करीब 11 वर्षों से श्वानों की संख्या नियंत्रित करने बधियाकरण अभियान चला रहा है। हर माह करीब 400 नर और मादा श्वान के बधियाकरण पर करीब तीन लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नगर निगम पिछले 11 वर्षों में अब तक तीन करोड़ 33 लाख रुपये से ज्यादा रकम खर्च कर चुका है। फिर भी इनकी बढ़ती तादात कम नहीं हो रही है। जिससे बधियाकरण अभियान पर भी सवाल उठने लगे है। बधियाकरण करने वाली संस्था मां बगुलामुखी सेवा समिति की दलील है कि श्वानों का बधियाकरण तो किया जा रहा है। लेकिन एक बार में मादा श्वान आठ से 10 पिल्लों को जन्म देती है। जिसके कारण इनकी संख्या कम नहीं हो पा रही है।
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अब तक 55 हजार श्वानों का हो चुका बधियाकरण: बधियाकरण अभियान पर इसलिए भी सवाल उठना लाजिमी है कि निगम के मुताबिक पिछले 11 वर्षों में करीब 55 हजार श्वानों का बधियाकरण किया गया। वर्ष 2010 में बधियाकरण का ठेका दुर्ग की एनीमल फाउंडेशन संस्था को दिया था। इसके बाद जनवरी 2021 में यह ठेका बगुला मुखी सेवा समिति को दे दिया गया है। निगम का दावा है कि अब तक करीब 55 हजार श्वानों का बधियाकरण किया जा चुका है। पिछले एक वर्ष में ही 7 हजार 934 श्वानों का बधियाकरण किया गया है।
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जहां से पकड़ा वहीं छोड़ा: श्वानों का बधियाकरण करने वाली संस्था के संचालक पंकज शुक्ला ने बताया कि जिस जगह से श्वान को पकड़ते हैं बधियाकरण के बाद कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करते हुए उन्हें वापस उसी जगह छोड़ देते हैं। यदि न छोड़ो तो पशु प्रेमी संगठन विरोध पर उतर आते हैं।
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ऐसा है खर्च का गणित-
- 705 रुपये मादा श्वान के बधियाकरण पर किए जा रहे खर्च
- 678 रुपये नर श्वान पर किए जा रहे खर्च
- 55 हजार श्वानों की हो चुका बधियाकरण
- 3 करोड़ 33 लाख रुपये से ज्यादा हो चुके खर्च
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कोई कोना नहीं जहां आवारा आतंक नहीं
- शहर का ऐसा कोई कोना नहीं नहीं आवारा शवानों का आतंक नही। खूंखार श्वानों का सबसे ज्यादा आतंक रद्दीचौकी, मदार टेकरी, सिविक सेंटर, कठौंदा, नया मोहल्ला, गुरंदी सहित अन्य क्षेत्रों में हैं।
- हर गली, मोहल्ला, कालोनी में श्वानों की धमचौकड़ी देखी जा सकती है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार: श्वानों का बधियाकरण अभियान जारी है। इसे प्रभावी बनाने के लिए हाल में ही शहर को दो भागों में बांटा गया है। जहां से संस्था की टीमें श्वानों को पकड़कर बधियाकरण करेंगी। कठौंदा में डाग हाउस में श्वानों को रखने के लिए जगह भी बढ़ाई गई है।
भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम