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उपभोक्ता आयोग ने कहा कि कंपनी दुर्घटनाग्रस्त कार के बीमा दावे का भुगतान करे

आयोग ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय के न्यायादृष्टांत के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि केवल वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण जैसे आधार पर बीमा दावा अस्...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 11:54:21 AM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 11:54:21 AM (IST)
उपभोक्ता आयोग ने कहा कि कंपनी दुर्घटनाग्रस्त कार के बीमा दावे का भुगतान करे
परिवादी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत राहत प्रदान की गई।

HighLights

  1. मानसिक प्रताड़ना व वाद व्यय भी देना होगा
  2. 30 दिन के भीतर 6.98 लाख रुपये अदा करे
  3. 30 जून, 2023 से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिला उपभोक्ता विवाद आयोग के अध्यक्ष पंकज यादव व सदस्य अमित सिंह तिवारी की युगलपीठ ने मैहर निवासी अरविंद त्रिपाठी का परिवाद स्वीकार किया।

बीमा दावा निरस्त किए जाने को सेवा में कमी माना

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दुर्घटनाग्रस्त वाहन के बीमा दावे का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा दावा निरस्त किए जाने को सेवा में कमी माना है।

निर्धारित कटौतियों के बाद अदा करने का निर्देश

परिवादी की ओर से अधिवक्ता अरुण जैन ने पैरवी की। आयोग ने बीमा कंपनी को 30 दिन के भीतर 6.98 लाख रुपये (निर्धारित कटौतियों के बाद) अदा करने का निर्देश दिया है।

मानसिक प्रताड़ना के लिए 15 हजार रुपये भी देना होगा

निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 30 जून, 2023 से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय की राशि भी अदा करने के आदेश दिए गए हैं।

बीमा दावा अस्वीकार करना उचित नहीं

आयोग ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय के न्यायादृष्टांत के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि केवल वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण जैसे आधार पर बीमा दावा अस्वीकार करना उचित नहीं है। इस आधार पर परिवादी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत राहत प्रदान की गई।


क्या था मामला

  • मैहर निवासी अरविंद त्रिपाठी ने अपनी कार का बीमा दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से कराया था।
  • बीमा अवधि के दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने कंपनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया।
  • जांच के दौरान कंपनी ने क्लेम निरस्त कर दिया कि वाहन का कब्जा पहले ही दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया था।
  • और स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़ी स्थिति के कारण बीमित का इंश्योरेबल इंटरेस्ट नहीं बचा था।
  • अधिवक्ता अरुण जैन के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में परिवाद दायर किया।

मुआवजा तथा वाद व्यय का भुगतान करने के आदेश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायादृष्टांत का हवाला देते हुए माना कि केवल स्वामित्व हस्तांतरण के आधार पर बीमा दावा निरस्त करना उचित नहीं था। आयोग ने बीमा कंपनी को दावा राशि, मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा तथा वाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया।

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