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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 03, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jabalpur News: नर्मदा में तैर रहे पत्थरों ने बढाई लोगों की उत्सुकता, दिन भर देखने लगा रहा तांता, देखें वीडियो

Jabalpur News: शहर के गौरीघाट के पास स्थित जिलहरी घाट में शनिवार की सुबह से नर्मदा में तैरते पत्थर को देखने भीड़ उमड़ रही है।

By Rahul RaikwarEdited By: Rahul Raikwar
Publish Date: Sat, 03 Jun 2023 05:01:08 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jun 2023 05:24:30 PM (IST)
Jabalpur News: नर्मदा में तैर रहे पत्थरों ने बढाई लोगों की उत्सुकता, दिन भर देखने लगा रहा तांता, देखें वीडियो

Jabalpur News: जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नर्मदा तट गौरीघाट के पास स्थित जिलहरी घाट में शनिवार की सुबह एक अजीबोगरीब नजारा देखने में आया। यहां लोगों ने पत्थरों के ऐसे टुकड़े देखे, जो वजनी होने के बावजूद पानी में तैरते रहे। जैसे ही यह जानकारी लोगों को लगी, मौके पर तमाशबीनों का हुजूम जमा हो गया। इसके बाद जिनको भी हाथों ये पत्थर लगे, वो पत्थरों को लेकर अपने-अपने घरों को चले गए। इसके बावजूद उत्सुक लोगों का दिन भर यहां आना-जाना लगा रहा।

कई दिनों से मंदिर में रखे थे पत्थर, पानी बढ़ा तो तैरने लगे

बताया जाता है कि जिलहरी घाट पर नर्मदा किनारे एक प्राचीन शिव मंदिर है। यहीं कुछ पत्थर काफी दिनों से रखे हुए थे। घाट के पास ही तैराकी सिखाने वाले शंकर श्रीवास्तव ने बताया कि वो लोग कई दिनों से शिव मंदिर के पास उन पत्थरों को रखे देख रहे हैं। शनिवार को बरगी डैम के द्वार खुलने के बाद जब मंदिर डूब गया तब उन लोगों की नजर घाट के पास ही तैर रहे इन पत्थरों पर पड़ी। पहले तो उनको अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने पत्थरों को अपने हांथों में लेकर देखा तब उनको विश्वास हुआ कि वो किसी खास तरह के पत्थर ही हैं। इसके बाद घाट पर ही लोगों ने पत्थरों का पूजा पाठ शुरु कर दिया।


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रामेश्वर में पाए जाने की चर्चा

जानकारों का मानना है कि संभवत: ऐसे ही पत्थरों का इस्तेमाल श्री रामसेतु के निर्माण में किया गया था। ऐसे पत्थर वहां पाए भी जाते हैं, इसलिए संभव है कि किसी ने वहां से लाकर इन पत्थरों को जिलहरी घाट पर रख दिया हो, लेकिन उनकी विशेषता पर लोगों की दृष्टि अब पड़ पाई हो।

Jabalpur News: नर्मदा में तैर रहे पत्थरों ने बढाई लोगों की उत्सुकता, दिन भर देखने लगा रहा तांता, देखें वीडियोhttps://t.co/epOdgrNb81#Narmda #Jabalpur #Floatingstone #NarmdaRiver pic.twitter.com/bJZXjLlFLX

— NaiDunia (@Nai_Dunia) June 3, 2023

कलेक्टर ने भी जताई उत्सुकता

इस खबर की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने भी इसे लेकर अपना कौतूहल व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर ऐसा होता नहीं है, लेकिन वास्तविकता क्या है, इस बारे में जानकारी इकट्ठी कराएंगे।

यह होती है रामश्वरम के तैरते पत्थरों की खासियत

इस मामले में जब भूगर्भ विज्ञानी संजय वमा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ पत्थर ऐसे होते हैं, जिनमें बहुत से सूक्ष्म या बड़े छद्रि होते हैं। लंबी अवधि के बाद वो छिद्र बंद हो जाते हैं। ऐसे पत्थरों का घनत्व पानी की अपेक्षा कम हो जाता है। ये पत्थर किसी प्राचीन भूगर्भीय हलचल का परिणाम होते हैं। इन पत्थरों को ट्यूमिक स्टोन या सरंध्र पत्थर कहा जाता है। जानकारी के अनुसार रामायणकाल में राससेतु के लिए एक विशेष प्रकार के पत्थर का भगवान राम द्वारा इस्तेमाल किया गया था। आज के समय में विज्ञान की भाषा में इस पत्थर को 'प्यूमाइस स्टोन' कहते हैं। यह पत्थर पानी में नहीं डूबता है। जानकारों के अनुसार इन पत्थरों का निर्माण ज्वालामुखी से बाहर आए लावा के कारण हुआ है। तो उसके साथ ठंडे होने पर कम तापमान के दौरान उसमें हवा का मिश्रण होने से उसमें अंदर तक कई छिद्र हो जाते हैं, जिनमें हवा भरी होती है। इसे प्यूमाइस पत्थर का नाम वैज्ञानिक भाषा में दिया गया है। इन छिद्रों में हवा के कारण यह पत्थर पानी में तैरता है।