
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र के मामले में मप्र कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। तीनों युवकों के दर्ज बयानों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक रूप से यह अवैध हिरासत का मामला लग रहा है।
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर भोपाल को इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि युवकों के बयानों को शिकायत मानकर कार्रवाई करें। कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट पेश करने कहा। राजस्थान पुलिस को भी जवाब देना है। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि विगत सुनवाई के दौरान राजस्थान पुलिस ने तीनों युवकों को हाई कोर्ट में पेश किया था। तीनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजस्थान पुलिस के दावों झूठा बताया था। राजस्थान पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया कि युवकों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया था।
यह भी पढ़ें- राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम की जमानत रद्द होगी या नहीं? 18 तारीख को आएगा हाईकोर्ट का फैसला
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र के मामले में एमपी कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले में युवकों के स्वजन भोपाल के खिजर खान व अन्य की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है।
अधिवक्ता एचएस छाबड़ा ने कोर्ट को बताया कि 20 अप्रैल, 2026 की सुबह लगभग तीन बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, भोपाल में पुलिस द्वारा कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं (निखिल, बिलाल व इनाम) को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था और उन्हें दो दिनों तक किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।