जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और उनकी संख्या में इजाफा करने के लिए रेलवे इन दिनों आधुनिक सिग्नल का उपयोग कर रहा है। इंटरमीडिएट ब्लाक सिग्नल नामक इस आधुनिक सिग्नल की मदद से एक रेल लाइन को दो खंड में विभाजित कर ट्रेनों की संख्या और रफ्तार, दोनों बढ़ाई जाती है। रेलवे ने अब इसका तेजी से उपयोग करना शुरू कर दिया है। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल ही नहीं बल्कि भोपाल और कोटा मंडल में भी इस आधुनिक सिग्नल की मदद से ट्रेनों की रफ्तार और संख्या बढ़ाई जा रही है।

दरअसल कटनी-सिंगरौली सिंगल्स रेललाइन खंड में जोबा से डुबरीकलां स्टेशनों के मध्य एक और अत्याधुनिक नया इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल लगाया गा है। इसे लगाने के बाद अब तीनों मण्डलों में कुल 101 इंटरमीडिएट ब्लॉक सिगनल सिस्टम स्थापित किए जा चुके है। इस साल का यह पांचवा इंटरमीडिएट ब्लॉक सिगनल सिस्टम है। इससे पहले बागरातवा- गुरमखेड़ी स्टेशनों, कटंगिखुर्द-सलहना स्टेशनों, मझगवां -टिकरिया स्टेशनों और टिमरनी-पगढाल स्टेशनों के बीच चार आईबीएस लगाए गए थे।

ट्रैक से हटा रहे कम स्पीड के निर्देश: रेलवे ने इन दिनों रेल पटरियों में ऐसे पॉइंट चिन्हित किए हैं जहां पर पहले से कम स्पीड की ट्रेनों को निकाला जा रहा है। यहां पर लगाए गए कौशन ऑर्डर को हटाकर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं । दरअसल यह वह पॉइंट है जहां पर ट्रेनों को कम स्पीड से निकालकर चलाया जाता है, पर अब सिग्नल की मदद से इन ट्रेनों की भी स्पीड बढ़ाई जा रही है।

नए सिग्नल का फायदा

- यह पूर्णत: इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर आधारित है।

- इससे रेल खंडों के सेक्शन क्षमता में वृद्धि क ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जा रही है

-आईबीएस में ब्लॉक इंस्ट्रूमेंट की आवश्यकता नहीं होती है

- स्टेशन मास्टर और ऑपरेटिंग स्टाफ की भी आवश्यकता नहीं होती है

- इससे स्टेशन बिल्डिंग और ऑपरेटिंग स्टॉप पर होने वाले खर्च की बचत होती है।

- दो ट्रेनों की दूरी को कम कर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाती है।

Posted By: Ravindra Suhane

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