
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। केंद्रीय उपक्रम में छह वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सकीय सेवाएं देने के बावजूद इन-सर्विस अभ्यर्थी का लाभ नहीं मिलने के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा और संचालक चिकित्सा शिक्षा को तीन सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित की गई है। यह याचिका शांतिनगर, जबलपुर निवासी डॉ. अभिषेक अग्निहोत्री की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नियमानुसार राज्य सरकार के विभागों में मेडिकल ऑफिसर के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों को मेडिकल पीजी प्रवेश में इन-सर्विस अभ्यर्थी का दर्जा दिया जाता है।
इस श्रेणी के लिए 30 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में एक वर्ष की सेवा पर 10 अंक और अधिकतम 30 अंकों का लाभ दिए जाने का प्रविधान है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार के उपक्रम नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एनएमडीसी), पन्ना में ग्रामीण क्षेत्र में छह वर्ष तक सेवाएं दी हैं। इसके बावजूद उन्हें इन-सर्विस अभ्यर्थी के रूप में पात्रता का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
इस आधार पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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