
तरुण मिश्रा, जबलपुर। नर्मदा नदी की सहायक बुढ़नेर नदी में रेत खनन खिलाफ एक महिला ने मोर्चा खोल दिया है। मंडला जिले के इंद्रा में बहने वाली इस नदी की सफेद रेत के अंधाधुंध खनन के खिलाफ विजयश्री ने सत्याग्रह आरंभ कर दिया है। डिंडौरी मार्ग पर जिला मुख्यालय से 35 दूर वह डेढ़ वर्ष पहले वह अपने पर्यावरण प्रेमी पति एटिला कोवेक्स के साथ बसने आईं, लेकिन यहां प्रकृति के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकीं। इस दंपती ने जिस बुढ़नेर के तट पर अपना खूबसूरत कच्चा आशियाना बनाया उसके तटबंध को रेत खनन करने वालों ने तहस-नहस कर दिया है। विजयश्री को रेत खनन का विरोध करने के कारण जान से मारने की धमकी और पैसों का लालच भी मिला, लेकिन वह डिगी नहीं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन हरकत में तो आया है, जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन खनन का काम जारी है।
रेत खनन रोकने रास्ते पर बैठकर काटी रात...
विजयश्री बताती हैं कि यहां साल भर से रेत खनन का काम चल रहा है। लेकिन यह दिसबंर का महीना बेहद तनावपूर्ण रहा। खनन रोकने के लिए घाट वाले रास्तों पर दिनभर बैठकर डंपरों की आवाजाही रोकी तो वह लोग रात को खनन करने लगे। विजयश्री बताती हैं कि नियम विरुद्ध यहां दिन-रात नदी से रेत पोकलेन मशीन लगाकर निकाली जा रही है। पेड़ों को काटकर डंपर निकालने के लिए रास्ता बना दिया गया है। डंपरों को रोकने के लिए वह दिनभर रास्ते पर बैठी रहीं और रात को वहीं सो गईं। बंदूक भी दिखाई गई, लेकिन वह टस से मस नहीं हुईं। नतीजतन उस दिन डंपर और पोकलेन मशीन लौट गई। दूसरे दिन वह मंडला कलेक्टर के पास लिखित शिकायत लेकर पहुंचीं। कलेक्टर हर्षिता सिंह से मुलाकात नहीं होने के बाद वापस आकर सत्याग्रह शुरू किया। इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज को मेल किया। सीएमओ से कलेक्टर को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए। विजयश्री के अनुसार 7 दिसम्बर को मोहगांव थाने का स्टाफ भी पहुंचा। इसी तारीख को मंडला कलेक्ट्रेट के नाम शिकायत रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजी, 8 दिसंबर को सीएम को मेल कियाा गया 13 दिसंबर को मेल का जवाब आया, जिसमें कलेक्टर को निर्देश देने की बात कही गई।
वीगन है दंपति
यह दंपती वीगन है। मांसाहार फिर शाकाहार और एक कदम आगे वीगन होते हैं। यह गाय का दूध का सेवन भी नहीं करते। इनका मत है कि दूध भी शाकाहार पदार्थ नहीं है। कोवेक्स मिनीमेलिज्म पर यकीन करते हैं यानि कम से कम जरुरत पर जीवन यापन करने के सिद्धांत पर चलना। इस वीगन दंपती की डाइट में दूध या इससे बने पदार्थ, शक्कर और तेल आदि शामिल नहीं 40 लाख रुपए सालाना खर्च करने वाले 57 वर्षीय कोवेक्स अब महज एक लाख रुपए सालाना में अपना जीवन बसर कर रहे हैं। मैराथन धावक कोवेक्स एयरोस्पेस क्षेत्र में काम कर चुके हैं। विजयश्री और कोवेक्स के बनाए अरण्य में 25 आम, 15 जामुन के पेड़ों के साथ अमरूद, कटहल के पौधे भी लगे हैं।
टेंडर निरस्त लेकिन खनन जारी
मंडला कलेक्टर हर्षिता सिंह का इस विषय पर यह कहना है कि बुढ़नेर नदी की रेत निकासी की स्वीकृति शासन दी थी। यह रेत की स्वीकृत खदान है लेकिन उत्खनन करने वाले ठेकेदार ने सुरक्षा निधि नहीं जमा की थीा इस वजह से इसका टेंडर निरस्त कर दिया गया है। रेत खनन के विरोध की शिकायतें प्राप्त हुई हैं और अधिक जानकारी संबंधित थाने से मांगी गई है।