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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Makar Sankranti 2024 : घर-घर में तिल-गुड़ के लड्डू बनाने में जुटीं महिलाएं

Makar Sankranti 2024 : महाराष्ट्र समाज में बुजुर्गों बच्चों को तिल गुड़ की बर्फी खिलाने की खास परंपरा है। वहीं बंगाली समाज में पर्व पर पीठे बनाए जाते ...और पढ़ें

By Dheeraj kumar BajpaiEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 12 Jan 2024 10:02:51 AM (IST)Updated Date: Fri, 12 Jan 2024 10:02:51 AM (IST)
Makar Sankranti 2024 : घर-घर में तिल-गुड़ के लड्डू बनाने में जुटीं महिलाएं

HighLights

  1. मकर संक्रांति की तैयारियों ने जोर पकड़ा।
  2. तिल दान का होता है विशेष महत्व।
  3. इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाएगा पर्व।

Makar Sankranti 2024 : जबलपुर, नई दुनिया प्रतिनिधि। संस्कारधानी में प्रत्येक पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है। हर कोई अपने-अपने तरीके से मकर संक्रांति का पर्व मनाने की तैयारी में जुटा है। इस वर्ष यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति पर तिल व गुड़ का महत्व होता है। महिलाएं तिल-गुड़ के लड्डू व बर्फी बना रही हैं।

15 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा

महाराष्ट्र समाज में बुजुर्गों बच्चों को तिल गुड़ की बर्फी खिलाने की खास परंपरा है। वहीं बंगाली समाज में पर्व पर पीठे बनाए जाते हैं। इस तरह से हर वर्ग मकर संक्रांति पर खास तैयारी में जुटा है। युवाओं और बच्चों में पतंगबाजी को लेकर खासा उत्साह है। महिलाएं घर पर तिल-गुड़ के लड्डू बनाने में जुट गई है। साथ ही मकर संक्रांति पर तिल दान का महत्व होता है। इस वर्ष 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा।


संक्रांति पर तिल-गुड़ का विशेष महत्व

प्रियंका जैन ने बताया कि ठंड के दिन में तिल और गुड़ खाना स्वास्थ्य के बेहतर होता है। ठंड में मेवे के लड्डू भी बनाते है। संक्रांति पर तिल-गुड़ का विशेष महत्व है। इसलिए तिल की बर्फी बनाने वाली हूं। घर में सभी को तिल की बर्फी भाती है। पहले से बच्चे बर्फी की डिमांड कर रहे है। तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इन्हें खाना सेहत के लिए फायदेमंद होगा।

हर काेई अपने घर की छत से पतंग उड़ाता नजर आता है

हमारे ग्रुप में मकर संक्रांति खूब धूमधाम से मनाई जाती है। हर कोई एंजाय करता है। हर काेई अपने घर की छत से पतंग उड़ाता नजर आता है। अब तो संक्रांति का पर्व पंतगबाजी के कारण और प्रिय हो गया है। बाजार में बच्चों के लिए कार्टून वाली पतंगो की डिमांड है।

हर उम्र वर्ग में उत्साह

रोशनी खत्री ने कहा कि मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी आदि को लेकर शहर में तैयारियां शुरु हो गई है। इन दिनों हर कोई तिल-गुड़ के लड्डू व अन्य पकवान बनाने में लगा हुआ है। त्योहारों पर पकवान की विशेष धूम होती है। हमारा शहर संस्कारधानी के नाम से जाना जाता है। किसी भी पर्व को सादे तरीके से नहीं मनाया जाता है।

...ताकि संक्रांति अच्छे से एंजाय कर सकें

हर पर्व को लेकर हर उम्र वर्ग को लेकर उत्साह रहता है। आज का समय इंटरनेट मीडिया का है। इसलिए सबसे ज्यादा फोटोसेशन होता है। मकर संक्रांति हर समाज के लोग अपने तरीके से मनाते हैं। घरों से तिल और गुड़ की महक आ रही है। महिलाएं लड्डू बनाने में जुट गई है। ताकि संक्रांति अच्छे से एंजाय कर सकें।

51 क्विंटल खिचड़ी का मकर संक्रांति भंडारा

हरे कृष्णा आश्रम, भेड़ाघाट में रविवार, 14 जनवरी को मकर संक्रांति 51 क्विंटल खिचड़ी का भंडारा होगा। यह परंपरा 29 वर्ष से अनवरत है। आश्रम के संस्थापक स्वामी रामचंद्र दास महाराज के सानिध्य में भगवान राधाकृष्ण को प्रथम भोग लगाकर खिचड़ी का महाभोग नर्मदा भक्तों, श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा। अध्यक्ष शरद अग्रवाल ने बताया दिन भर आश्रम में संकीर्तन, भजन, कवि सम्मेलन का आयोजन होगा।

11 किलो खिचड़ी से चालू भंडारा 51 क्विंटल पर पहुंच गया

आश्रम के व्यवस्थापक नर्मदा महाआरती के संस्थापक डा. सुधीर अग्रवाल ने बताया 11 किलो खिचड़ी से चालू किया गया भंडारा धीरे-धीरे 51 क्विंटल पर पहुंच गया है। हजारों की संख्या में गांव से लोग आते हैं। महाप्रसाद का भोग पाते हैं, यह 30 वा भंडारा है। महाराज ने कहा मकर संक्रांति पर्व तिल-गुड़ खाकर आपस में मतभेद भुलाकर खुशी मनाने का दिन है। .वि.