
नईदुनिया प्रतिनिधि, झाबुआ। थांदला से टीमरवानी के बीच बन रहे 80.45 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण में उचित मुआवजे की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से जारी किसानों का आंदोलन आखिरकार सोमवार को समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ वर्चुअली हुई चर्चा के बाद चार गुना मुआवजा देने की घोषणा की गई। जिससे संतुष्ट होकर किसानों ने अपना धरना और आंदोलन समाप्त कर दिया और अपने घरों की ओर लौट गए।
करीब 3,839 करोड़ रुपए की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना के तहत मुआवजा वितरण का कार्य फिलहाल अंतिम चरण में है। इस परियोजना के दायरे में 50 से अधिक गांव आ रहे हैं, जिसके लिए कुल 155.579 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। हालांकि मूल्यांकन में भारी अंतर और चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान पिछले काफी समय से नाराज चल रहे थे।
गुरुवार से शुरू हुए इस आंदोलन के तहत किसान झाबुआ कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। आंदोलन के दौरान राजनीतिक सरगर्मी भी तेज रही, जिसमें कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के स्थानीय नेताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की थी। प्रदेश सरकार की मंत्री निर्मला भूरिया एवं नागरसिंह चौहान ने भी किसानों को मुख्यमंत्री से चर्चा कराकर इस समस्या का उचित हल निकालने का पूरा आश्वासन दिया था।
भारतीय किसान संघ ने सोमवार को अपने इस आंदोलन को एक निर्णायक मोड़ पर ले जाने की स्पष्ट घोषणा कर दी थी। इसी बीच, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से आंदोलनकारी किसानों के साथ वर्चुअल चर्चा की विशेष व्यवस्था की गई। इसके लिए धरना स्थल पर ही एक बड़ा टीवी सेट लगाया गया, जिसके माध्यम से मुख्यमंत्री सीधे किसानों से जुड़े और संवाद स्थापित किया।
इस महत्वपूर्ण मौके पर भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमलसिंह आंजना सहित प्रदेश और मालवा प्रांत की पूरी टीम प्रमुख रूप से मौजूद रही, जिन्होंने मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आंदोलन के सफलतापूर्वक समापन की आधिकारिक घोषणा की।
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किसान संघ आरपार की लड़ाई के मुड़ में था। चार दिन धरने के बाद भी कोई हल नहीं निकला तो इंदौर में होने वाली प्रांत स्तरीय बैठक को झाबुआ में किया गया। सोमवार को सुबह प्रांतीय अधिकारियों ने संबोधित किया था। साथ ही अन्य जिलों से किसानों को लाकर बड़ा आंदोलन की चेतावनी दी थी।
प्रांत अधिकारियों ने सोमवार 4 बजे तक का समय दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री तक बात पहुंची और वर्चुअली चर्ची के बाद किसान माने। हालांकि मामले में कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया व नागरसिंह चौहान ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा की थी।