
-खसरे की आशंका, स्वास्थ्य विभाग का इंकार
-अंतिम संस्कार के बाद कुछ कहना मुश्किल
झाबुआ/रानापुर। रानापुर से 10 किमी दूर ग्राम भूतबयड़ा में तेज बुखार के बाद 7 वर्षीय बालिका सविता पिता कालिया की मौत हो गई। बच्ची को बुधवार को रानापुर अस्पताल लाया गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया। आशंका है कि बालिका को खसरे का संक्रमण था। उसकी मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला अचानक हरकत में आया और बुधवार शाम बीएमओ उषा गेहलोत गांव पहुंचीं। यहां 7 अन्य बच्चे बीमार मिले। उन्हें गुरुवार सुबह 108-एम्बुलेंस से अस्पताल बुलाया गया। 6 बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया और एक में निमोनिया के लक्षण पाए जाने पर उसे भर्ती कर लिया गया।
बीमार बच्चों के परिवार वालों और गांव के लोगों से जो जानकारी मिल रही है, उससे यही बात सामने आ रही है कि बच्चों में संभावित तौर पर खसरे के लक्षण हैं। जिस बालिका की मौत हुई, उसके बारे में भी ये पता चला है कि बुखार के साथ शरीर पर चकते आए थे। हालांकि अब मौत के कारणों के बारे में पता लगाना मुश्किल है, क्योंकि सविता का दाह संस्कार किया जा चुका है। गांव के लोगों ने बताया कि बीमार बच्चों को 'माताजी' निकली है। उन्हें ठीक करने के लिए पूजा-पाठ करवा रहे थे। इस बीच बुधवार को अस्पताल से डॉक्टर आए और बच्चों को यहां बुलवा लिया। गुरुवार को मैसू पिता जोगड़ा (4), पिल्केश पिता बापू (2), अल्केश पिता धनजी (3), काजल पिता धनजी (1), सुनीता पिता धनजी (2), अनिता पिता कांजी (1) और संगीता पिता मुकेश (1) को उपचार के लिए लाया गया। इनमें से पिल्केश पिता बापू गंभीर बीमार था। उसमें निमोनिया के लक्षण होने से अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।
अस्पताल लाने में हुई देर
जिले में लगातार चल रहे खसरे के प्रकोप के बाद अचानक इसी तरह के संभावित कारणों से बच्ची की मौत से स्वास्थ्य विभाग का अमला हरकत में आ गया। बुखार से मौत का शिकार हुई सविता के परिवार वालों के अनुसार उसे पिछले 2-3 दिनों से तेज बुखार था। मंगलवार को रानापुर अस्पताल लाने वाले थे, लेकिन फिर सुबह लाना तय किया गया। बुधवार सुबह गांव का कोई बच्चा पेड़ से गिर गया। सब लोग उस मामले में लग गए तो सविता को लाने में देर हो गई। दोपहर बाद परिवार वाले उसे बाइक से रानापुर लाए। बीएमओ उषा गेहलोत का कहना है कि बच्चे को लाने तक उसकी मौत हो चुकी थी जबकि परिवार वालों के अनुसार उसका उपचार शुरू कर दिया गया था, उसके बाद मौत हुई।
ताबड़तोड़ दौड़े गांव, फिर भी समय पर उपचार नहीं
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के लोग ये मानने को तैयार नहीं हैं कि बच्चों में खसरे का संक्रमण है, लेकिन बुधवार को सविता की मौत के बाद विभाग का अमला गांव की तरफ अचानक दौड़ पड़ा था। शाम को ही बीएमओ सहित अन्य डॉक्टर गांव में पहुंच गए। उन्हें गुरुवार सुबह 108-एम्बुलेंस से अस्पताल बुलाया गया। बच्चों के साथ परिजन सुबह 9 बजे पहुंच गए, लेकिन उपचार शुरू नहीं हुआ। वे डॉक्टर्स रूम में नीचे बैठे रहे। जब मीडिया के लोग पहुंचे तो यहां डॉ. जीएस चौहान अकेले थे। डॉ. एसएस गेहलोत छुट्टी पर थे। यहां बताया गया कि बीएमओ राउंड पर हैं। मीडिया की खबर सुनकर बीएमओ आईं और उनके कक्ष में बच्चों को ले जाकर परीक्षण किया गया।
'माताजी' निकली रही
गांव के धनजी डाबर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गांव में बच्चों को 'माताजी' निकल रही है। यहां के रोजगार सहायक वीरेंद्र ने बताया कि लगभग पंद्रह दिन पहले भी 8-10 बच्चों को इसी तरह से बुखार आने पर रानापुर अस्पताल भेजना पड़ा था। -हमारे प्रतिनिधि
एक को किया भर्ती
7 बच्चों को उपचार के लिए बुलवाया था। इनमें से एक को भर्ती किया गया है। जिस बच्ची की मौत हुई, उसके कारणों के बारे में कैसे बता सकते हैं। उसका अंतिम संस्कार भी हो गया।
-डॉ. उषा गेहलोत, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, रानापुर