
Mahi Canals Open पेटलावद(नईदुनिया न्यूज)। अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की वजह से इस बार माही का पानी समय पर मिलने की आस नहीं दिख रही थी, लेकिन आधिकारियों की समझाइश के बाद मामला सुलझ गया और आखिरकार जीवनदायिनी माही बांध का पानी नहरों के माध्यम से जैसे ही खेतों में पहुंचा किसानों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।
इस बार माही नहर से पानी मिलने की उम्मीद में रबी की बोवनी का रकबा भी लगभग दोगुना हो जाएगा। माही और जल संसाधन विभाग की नहरों से करीब 39 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य रखा है। बोवनी कार्य लगभग आधे से ज्यादा हिस्से में हो चुका है। शेष बोवनी के लिए किसान जुटे हुए हैं। जहां बोवनी हो चुकी है, वहां अब सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता महसूस होने लगी थी।
माही की नहर शुरू होने से किसानों में खासा उत्साह नहर आया। गौरतलब है कि चारणकोटड़ा माही बांध की नहर पर पिछले पांच दिनों से डूब प्रभावित इलाक के ग्रामीण धरने पर बैठे थे। इसके कारण माही नहरों में पानी नही छोड़ा गया था। शुक्रवार को अधिकारियों की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया और माही की मुख्य केनाल से पानी को छोड़ा गया।
इस वर्श कुल 43 हजार 765 हेक्टेयर भूमि में रबी की बोवनी होने की संभावना है। कृषि विभाग ने इस वर्ष 42 हजार 297 हेक्टेयर में गेहूं का लक्ष्य रखा था और अब तक करीब 15 हजार हेक्टेयर में केवल गेहूं की बोवनी हो चुकी है। वहीं चने की बोवनी भी जारी है। हालांकि बोवनी का काम अभी चल रहा है। वहीं दूसरी ओर कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण प्रशासन ने भी किसानों को सिंचाई के लिए सारे तालाबों से पानी उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। किसानों की मांग पर नहरों में पानी छोड़ दिया गया है।
गेहूं और चने की फसल के लिए विशेषकर माही बांध और अन्य तालाबों की नहरों के माध्यम से पानी आता है। इस बार माही की नहरों से 30 हजार हेक्टेयर और जल संसाधन विभाग के 84 तालाबों से 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नहरों से पानी दिया जाएगा।
नहर में पानी आने से किसानों ने आनन-फानन में बोवनी करने में लग गए और नहर में अपने-अपने खेतों में सिंचाई के लिए साधन लगाने में जुट गए। जो किसान नहर के इंतजार में थे। नहर आने के बाद उन्होंने भी बोवनी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि अबकी बार नवंबर के अंतिम दो सप्ताह में नहरों में पानी दिया है, तो मार्च आखिरी तक पानी मिलना चाहिए।
माही के एसडीओ एमएस कुरैशी ने बताया कि किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। समय-समय पर सिंचाई के लिए चार बार पानी दिया जाएगा। किसानों को चाहिए कि नहरों से छोड़े जाने वाले पानी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। पानी को व्यर्थ बहने से बचाएं। पूरे सीजन में नवंबर से फरवरी तक पानी किसानों को सिंचाई के लिए दिया जाएगा। जिसमें एक पलेवा के लिए बाकी तीन पानी सिंचाई के लिए दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर किसानों को जरूरत हुई तो पानी दिया जाएगा।