झाबुआ। अंचल का प्रमुख आदिवासी लोकपर्व भगोरिया इस वर्ष 23 फरवरी से आरंभ होकर 1 मार्च तक चलेगा। वर्ष में एक बार मनाए जाने वाले इस पर्व के कारण हफ्तेभर तक क्षेत्र में उल्लास छाया रहता है। पर्व मनाने के लिए पलायन स्थलों से भी ग्रामीण बड़ी संख्या में अपने गांव लौटेंगे। लगभग चार दर्जन स्थानों पर भगोरिया मेला लगेगा।

जिस दिन का संस्कृति प्रेमी बेसब्री से इंतजार करते है, वह पर्व अब निकट आ चुका है। अगले माह यहां भगोरिया की धूम आरंभ हो जाएगी। इसमें मस्ती व उल्लास रहेगा तो आदिवासी संस्कृति की झलक भी नजर आएगी। पेट की आग बुझाने के लिए क्षेत्र की 60 प्रतिशत जनता पलायन करती है। रोजगार की तलाश में दूर-दूर तक जाने वाले ग्रामीण जहां कहीं भी होंगे, भगोरिया की महक उन्हें अपने गांव लौटने के लिए वापस मजबूर करेगी।

वार्षिक मेले भगोरिया की प्रमुख विशेषता यह है कि 7 दिनों तक लगातार यह चलता है। हर दिन कहीं न कहीं भगोरिया मेला रहता है। इन मेलों में गांव के गांव उमड़ पड़ते है। छोटे बच्चे से लेकर वृद्घ तक अनिवार्य रूप से इसमें सहभागिता करते है। ढोल, मांदल, बांसुरी जैसे वाद्य यंत्रों की मीठी ध्वनि और लोक संगीत के बीच जब सामूहिक नृत्य का दौर भगोरिया मेले में चलता है तो चारों ओर उल्लास ही उल्लास बिखर जाता है। साथ ही होती है झूला-चकरी की मस्ती व पान तथा अन्य व्यंजनों की भरमार। चाहे जितने जीवन में संघर्ष हो लेकिन सब कुछ भूलकर हर ग्रामीण भगोरिया की मस्ती में डूबा दिखाई पड़ता है।

रियासत काल से चल रही

धुलेंडी के सात दिन पहले से यह पर्व आरंभ हो जाता है। रियासत काल से ही यह पारंपारिक त्योहार यहां चल रहा है। पर्व को लेकर अलग-अलग इतिहास भी बताए जाते है। कुछ इतिहासकार कहते है कि ग्राम भगोर से यह पर्व आरंभ हुआ, इसलिए इसका नाम भगोरिया पड़ गया। कुछ लोगों का मानना है कि होली के पूर्व लगने वाले हाटों को गुलालिया हाट कहा जाता था। इसमें खूब गुलाल उड़ती थी। बाद में होली के पूर्व मनाए जाने वाले इन साप्ताहिक हाटों को भगोरिया कहा जाने लगा। मान्यता चाहे जो हो, लेकिन मैदानी हकीकत यह है कि यह वार्षिक पर्व अपनी संस्कृति की सुगंध हमेशा से चारो ओर बिखेर रहा है।

झाबुआ-आलीराजपुर जिले के भगोरिया पर्व

23 फरवरी : कठ्ठीवाड़ा, वालपुर, उदयगढ़, भगोर, बेकल्दा, मांडली और कालीदेवी।

24 फरवरी : मेघनगर, रानापुर, नानपुर, उमराली, बामनिया, झकनावदा और बलेड़ी।

25 फरवरी : झाबुआ, छकतला, सोरवा, आमखूंट, झीरण, ढोलियावाड़, रायपुरिया, काकनवानी, कनवाड़ा और कुलवट।

26 फरवरी : आलीराजपुर, आजादनगर, पेटलावद, रंभापुर, मोहनकोट, कुंदनपुर, रजला, बडगुड़ा और मेड़वा।

27 फरवरी : बखतगढ़, आम्बुआ, अंधारवड़, पिटोल, खरड़ू, थांदला, तारखेड़ी और बरवेट।

28 फरवरी : चांदपुर, बरझर, बोरी, उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोरायता, कल्याणपुरा, खट्टाली, मदरानी और ढेकल।

1 मार्च : फुलमाल, सोंडवा, जोबट, पारा, हरिनगर, सारंगी, समोई और चैनपुरा।

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