
नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। देश की सबसे लंबी जल सुरंग बनकर तैयार हो गई है। प्रदेश के मुखिया के निरीक्षण के बाद मशीन को बाहर निकालने के साथ अन्य सामग्री हटाने का कार्य जारी है।
एनवीडीए ने पहले अक्टूबर के अंत तक नर्मदा जल को विंध्य तक पहुंचाने की बात कही थी, लेकिन लगातार हुई वर्षा ने पड़वार रोड पर बनाए गए सीमेंट कुएं से मशीन को खोलकर बाहर निकालने में बाधा पहुंचाई तो वहीं टनल के अंदर से भी सामग्री निकालने पानी के कारण मशक्कत करनी पड़ रही है।
आखिरी में पंप, पाइप व पटरी आदि निकालने का कार्य होगा, जिसमें नवंबर माह के तीसरे सप्ताह तक काम पूरा होने की उम्मीद विभाग ने जताई है। नवंबर माह में काम पूरा होने के बाद विभाग नर्मदा जल को जल सुरंग से पार करते हुए विंध्य तक भेजने का कार्य शुरू कर सकता है।
टनल की खोदाई का कार्य पूरा होने और टनल बोरिंग मशीन सहित अन्य सामग्री के बाहर निकलने के बाद उसके माध्यम से नर्मदा जल को कटनी होते हुए विंध्य के जिलों तक भेजा जाएगा। 11.952 किलोमीटर लंबी टनल देश की सबसे लंबी वाटर टनल है, जो नर्मदा की जलधारा को बिना पंप की सहायता प्राकृतिक बहाव के साथ सोन बेसिन से जोड़ने का सेतु के रूप में कार्य करेगी।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना की दाई तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116.865 किलोमीटर के बीच निर्मित इस टनल का कार्य करीब डेढ़ दशक से चल रहा था। कैनाल की जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है। टनल के माध्यम से पानी के आगे बढ़ने के बाद कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना जिले के 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, जबकि उसी नहर से टनल के पहले तक जबलपुर जिले की 60 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है।
परियोजना से कटनी जिले का 21 हजार 823 हेक्टेयर, मैहर का 54 हजार 227 हेक्टेयर, सतना का एक लाख चार हजार 970 हेक्टेयर, पन्ना का 448 हेक्टेयर और रीवा का तीन हजार 84 हेक्टेयर क्षेत्र सीधे लाभांवित होगा। इसके साथ ही इन जिलों के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिलेगा।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली स्लीमनाबाद की यह दायीं तट मुख्य नहर प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक पानी डिस्चार्ज कैपेसिटी वाली नहर होगी। टनल निर्माण में 1600 करोड़ रूपये से अधिक राशि खर्च की गई है।
परियोजना के कार्य में ओपन नहर का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। टनल का कार्य वर्ष 2011 में प्रारंभ हुआ था और उसे 40 माह में बनाया जाना था। पहाड़ों को चीरकर बनाई गई टनल में मिट्टी धंसने, विदेशी मशीनों के कटर टूटने, हार्ड पत्थर आ जाने के साथ कई तरह की बाधाएं आई और 799 करोड़ की लागत बढ़कर 1600 करोड़ को पार कर गई। कार्य में लगभग 16 वर्ष का समय लग गया और इस बीच बनाई गई ओपन नहरें कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिनको ठीक कराने का कार्य भी एनबीडीए करा रहा है। वहीं टनल के दोनों ओर के हिस्सों को ओपन नहर से जोड़ने के साथ मशीन को कुएं से बाहर निकालने के बाद उसे सुरक्षित बंद कराने का कार्य भी होगा।
इनका कहना है
सबसे बड़ी दिक्कत टनल के कार्य काे पूरा कराना था, जाे पूरा हो गया है। अब मशीन के हिस्सों को खोलकर बाहर निकालने के साथ ही टनल के अंदर की सामग्री को सुरक्षित रूप से निकालने का कार्य जारी है। वर्षाकाल का समय है और इसके चलते काम की गति कम होने से उम्मीद है कि नवंबर माह के तीसरे सप्ताह तक कार्य पूरे हो जाएंगे और उसके बाद सिंचाई के लिए नर्मदा जल को आगे बढ़ाने का कार्य शुरू कराया जाएगा।
सहज श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण