खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रेलवे मंत्रालय द्वारा स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प सामग्री को प्रोत्साहन एवं उत्पादकों की आजीविका को बढ़ाने उद्देश्य से भारत के 5000 स्टेशनों पर वन स्टेशन वन प्रोडक्ट योजना लागू की है। इसी योजना के अंतर्गत बांस कला केंद्र गुलाई माल के आदिवासी जनजाति कारीगरों द्वारा बांस से निर्मित खूबसूरत वस्तुओं की प्रदर्शनी खंडवा रेलवे स्टेशन पर लगाई गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन तीन जुलाई को हुआ। समापन 17 जुलाई को होगा। देश के विभिन्ना प्रांतों से आने वाले यात्री जिले में निर्मित बांस उत्पादों को खरीद पाएंगे। इससे स्थानीय कलाकारों को प्रोत्सहन मिलेगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन डा. सीवी रमन विवि के कुलपति डा. अरुण जोशी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ऐसा पहला अवसर होगा जब आदिवासी जनजाति कारीगरों द्वारा निर्मित बांस की वस्तुएं रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को आकर्षित करेंगी। साथ ही कारीगरों की आजीविका में भी वृद्धि होगी। जनजाति कारीगरों के लिए यह पल उनके उत्साह और कार्य करने की कार्य क्षमता को दुगना कर रही है। क्योंकि इसी रेलवे स्टेशन से यह कारीगर काम की तलाश में कहीं दूर शहर चले जाते थे। आज उसी रेलवे स्टेशन पर कारीगरों द्वारा बनाए जा रहे बांस के खूबसूरत उत्पादो का विक्रय होगा। सभी कारीगर भारत सरकार की स्फूर्ति योजना को उनके जीवन में आए बदलाव के लिए वरदान मान रहे हैं। डा. श्रीराम परिहार ने स्थानीय कला के रोजगार उन्मुखीकरण को सराहा। बांस कला केंद्र गुलाई माल के कारीगरों को इससे प्रोत्साहन मिलेगा। इस अवसर पर रवि चतुर्वेदी, शरद जैन, एनके शर्मा, गोविंद शर्मा, मोहन रोकड़े, कैलाश मंडलेकर एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। संचालन डा. शहजाद कुरैशी ने किया।

बांस से बनी दीवार घड़ी लोगों की पसंद

ग्राम गोलाइमाल के कारिगरों द्वारा बांस से निर्मित 50 से अधिक वस्तुएं वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के तहत रखी गई है। इसमें सबसे अधिक बांस से बनी दीवार घड़ी लोगों को पसंद आई। कुछ यात्री इसे खरीदकर ले गए। बांस कला केंद्र के मोहन रोकड़े ने बताया सबसे कम कीमत में बांस से बने पेपर वेट व सबसे अधिक कीमत में बांस से बनी कुर्सी है। इसके साथ ही फल रखने का स्टैंड, हेयर क्लीप, टोकरी, मोबाइल स्टैंड, कान की बाली, बच्चों के लिए खिलौना बैलगाड़ी, कप, फोटो फ्रेम आदि सामग्री प्रदर्शित की गई है। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक यह प्रदर्शनी लगाई जा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close