
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। उपार्जन केंद्रों पर लंबी कतार और उपज को लेकर चार से पांच दिनों तक इंतजार।अगर किसी तरह उपज का तौल हो भी गया तो उसके बाद भुगतान के लिए लंबा इंतजार। इस बार सरकार द्वारा की जा रही उपज खरीदी से परेशान होकर अब किसानों ने मंडी में ही कम दाम पर उपज बेचने का फैसला लेना शुरू कर दिया है।
दो दिनों के अवकाश के बाद सोमवार को बड़ी मात्रा में मंडी में उपज से भरे वाहन पहुंचे।इसमें सबसे अधिक वाहन गेहूं से भरे हुए थे। करीब 15 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं पहुंचा और 2450 रुपये प्रति क्विंटल तक नीलामी हुई।खास बात यह है कि इसमें कई किसान ऐसे भी मिले जाे उपार्जन केंद्रों की वर्तमान स्थिति से घबराकर मंडी में उपज विक्रय करने पहुंचे थे।
किसानों ने कहा कि केंद्रों पर हालत खराब है, उपज से भरे वाहनों की लंबी कतार लगी हुई है। हम्मालों की कमी के चलते चार से पांच दिनों में तौल का नंबर लग रहा है। इतने दिनों तक वाहन का भाड़ा और दिन-रात भूखे-प्यासे केंद्र के बाहर बैठे रहने से अच्छा है कि कम दाम में मंडी में ही विक्रय कर दें। उन्होंने बताया कि हर किसान के पास स्वयं का वाहन उपलब्ध नहीं है और अगर भाड़े के वाहन में उपज लेकर आते हैं तो करीब एक हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त खर्च हो रहा है।इसलिए किसान अब केंद्रों से दूरी बना रहे हैं।
किसानों ने कहा कि स्लाट बुक करने के बाद एक सप्ताह का समय तौल के लिए मिलता है। इसमें चार से पांच दिनों तक तो केंद्र पर वाहन कतार में खड़े रह रहे हैं। इस दौरान कई किसानों के साथ तो तौल भी पूरा नहीं हो पाता और समयसीमा समाप्त हो जाती है। इसके चलते किसानों को शेष उपज मंडी में लेकर पहुंचना पड़ रही है।
किसानों ने कहा कि उपज विक्रय में देरी हो चुकी है।कहीं शादी का आयोजन तो कहीं आवश्यकता पर किसानों ने बाहर से रुपये उधार ले लिए थे।अब उन्हें इन लोगों को रुपये लौटाना भी है, उपज विक्रय के इंतजार में बैठने से काम नहीं चल सकता है।यहां तक कि आगामी खरीफ सीजन को लेकर तैयारी के लिए भी रुपयों की आवश्यकता को देखते हुए किसान उपार्जन केंद्रों से दूरी बना रहे हैं। किसानों ने कहा कि मंडी में भले ही कम दाम मिल रहा है, लेकिन शाम को भुगतान होने से कर्ज चुकाने के साथ ही खेतों की तैयारी और खाद, बीज व दवाईयाें की खरीदी तो कर सकेंंगे।
पंजीयन के साथ आठ-नौ मई का स्लाट बुक भी कर लिया था।लेकिन उपार्जन केंद्र पर भीड़ अधिक होने के चलते आठ दिन में उपज के तौल का नंबर आ रहा है।लंबी कतार और किसानों को परेशान होता देख उपज विक्रय के लिए मंडी लेकर आया हूं। - मुकेश चौहान, किसान कोलगांव
स्लाट बुक करने के बाद 30 अप्रैल से आठ मई तक समय दिया गया था, उपज लेकर केंद्र पर पहुंचे तो वहां कतार में लगने के बाद पांचवे दिन तौल हो सका।मेरी कुल उपज 198 क्विंटल थी और तौल सिर्फ 120 क्विंटल का ही हो सका।इसके बाद शेष उपज को बाहर 2450 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर विक्रय करना पड़ा। - गुलाब पटेल, किसान पांगरा
इस बार खरीदी के लिए किसान को परेशान होने के साथ ही लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।उपज विक्रय के बाद ही उसके पास रुपये आ सकते हैं।तभी वह लेन-देन और अन्य कार्य करेगा।किसानों को खरीफ के लिए तैयारी भी करना है और अब वह परेशान नहीं होना चाहता।यही कारण है कि केंद्रों को छोड़कर मंडी में उपज का विक्रय कर रहे हैं। - सुभाष पटेल, जिलामंत्री भारतीय किसान संघ
केंद्रों खरीदी की गति को बढ़ाने के लिए हम्माल और तौल कांटे बढ़ाने के लिए निर्देशित किया गया है।यहां तक कि लगातार मानिटरिंग भी की जा रही है।प्रयास यही कर रहे हैं कि जल्द से जल्द किसानों की उपज का तौल करवा सकें। - दिनेश सावले, प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी
खंडवा: ‘सफेद सोने’ की तरफ किसानों का रूझान, सोयाबीन से तौबा के बाद मक्का का भी नहीं मिला भाव