
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं के लिए 'वीआईपी (VIP) दर्शन' की एक बेहद अनोखी और कल्याणकारी व्यवस्था शुरू की गई है। यदि आप बिना लंबी कतारों में लगे भगवान ओंकारेश्वर के सुलभ और शीघ्र दर्शन करना चाहते हैं, तो अब आपको इसके लिए रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक यूनिट रक्तदान करना होगा। समाज सेवा और आस्था के इस अनूठे संगम को श्रद्धालुओं का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है।
इस अभिनव योजना की परिकल्पना खंडवा के जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने की है। कलेक्टर के अनुसार, एक बार सड़क दुर्घटना के दौरान खून के लिए तड़पते मरीज को देखने के बाद उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न मंदिर में शीघ्र दर्शन की व्यवस्था को रक्तदान से जोड़ दिया जाए। इससे आपातकालीन स्थितियों, गंभीर बीमारियों और प्रसव के दौरान महिलाओं को होने वाली खून की कमी को दूर किया जा सकेगा।
ओंकारेश्वर में सामान्य दिनों में 50 हजार और त्योहारों या वीकेंड पर एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में लंबी कतारों से बचने के लिए ₹300 की सशुल्क शीघ्र दर्शन व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन अब इसके समानांतर रक्तदान की यह मानद व्यवस्था खड़ी की गई है।
इस योजना की शुरुआत इसी वर्ष 24 फरवरी 2026 को प्रायोगिक (ट्रायल) तौर पर ओंकार प्रसादालय से की गई थी। शुरुआत में यह सुविधा केवल मंगलवार और शनिवार को उपलब्ध थी। प्रयोग की भारी सफलता और सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इसे प्रतिदिन के लिए लागू कर दिया गया है। वर्तमान में यह केंद्र शांति निकेतन वृद्धाश्रम से संचालित हो रहा है।
पिछले पांच महीनों के भीतर लगभग 2500 श्रद्धालु इस केंद्र पर आकर रक्तदान कर चुके हैं, यानी औसतन हर दिन 20 लोग जीवनदायी रक्त देकर सीधे वीआईपी द्वार से बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ओ.पी. जुगतावत ने बताया कि इस नवाचार के बाद जिले के ब्लड बैंक में रक्त की कमी पूरी तरह समाप्त हो गई है। अब खंडवा से अन्य जरूरतमंद जिलों को भी रक्त की आपूर्ति की जा रही है।
इस मानवीय पहल की गूंज दिल्ली तक पहुंच चुकी है। ओंकारेश्वर प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल को भी इस व्यवस्था से अवगत कराया गया था, जिन्होंने इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की।
इस मॉडल की सफलता को देखते हुए अब मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, ओरछा के श्री राम राजा मंदिर, मैहर के मां शारदा देवी मंदिर और दतिया की पीतांबरा पीठ में भी इसे लागू करने की योजना बनाई जा रही है।