
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। वन विभाग द्वारा जंगल में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और वनभूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त और पुख्ता कार्रवाई की जा रही है। विभाग की नजर वन क्षेत्र में निवासरत भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर भड़काने वाले वन माफियाओं पर लंबे समय से है।
इनके हौसले पस्त कर जंगल को कटने से बचाने के लिए वन विभाग द्वारा पेशेवर बदमाश और वन माफियाओं की कुंडली तैयार की जा रही है। वनमंडलाधिकारी के प्रस्ताव पर कलेक्टर ने दो बदमाशों पर रासुका अंतर्गत कार्रवाई कर उन्हें जिलाबदर किया है। सूत्रों का कहना है कि वन विभाग को चार-पांच साल से वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर खेती करने वालों को जंगल से खदेड़ना है।
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वन मंडलाधिकारी सामान्य वनमंडल खंडवा ने कलेक्टर कार्यालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत कर अनावेदक करताप पुत्र लाखासिंग, निवासी ग्राम भिलाईखेड़ा थाना पिपलोद, तहसील खंडवा तथा अनसिंग पुत्र जैमाल 50 वर्ष निवासी सरमेसर थाना खालवा पर कार्रवाई की मांग की थी। प्रतिवेदन में वर्ष 2019 से वर्तमान तक आरोपितों पर आदिवासियों को भड़काकर वनों को नुकसान पहुंचाकर वन भूमि पर कब्जे के आरोप हैं।
आरोपित करताप पर गुड़ी वन परिक्षेत्र कक्ष क्रमांक 748 और 749 तथा आरोपित अनसिंग पर कक्ष क्रमांक 260 में वानिकी कार्यों तथा जैव विविधता को नष्ट करने के लिए वृक्षों की अवैध कटाई कर वनभूमि पर अतिक्रमण के लिए उकसाने के आरोप हैं। अनावेदक अपने साथियों के साथ ग्राम भिलाईखेड़ा व आसपास के गांवों में सक्रिय रहते हैं। असामाजिक तत्वों के साथ रहने तथा अनाधिकृत रूप से पेड़ों की अवैध कटाई, वनभूमि पर अतिक्रमण करने का प्रयास करते हैं।
इनके विरुद्ध ग्रामीण क्षेत्रों की भोलीभाली जनता आपराधिक गतिविधियों की शिकायत करने तथा साक्ष्य देने से भी डरती है। अनावेदक के विरुद्ध वन विभाग द्वारा वन अपराध पंजीबद्ध भी किए हैं, साथ ही पुलिस विभाग द्वारा भी एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई भी की गई है।
अनावेदक आदिवासियों को भड़काकर वन कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों को जंगल में घुसने नहीं देता। यदि वन कर्मचारी आदिवासियों को अवैध कटाई और अतिक्रमण न करने की समझाइश देने जाते हैं तो अनावेदक आदिवासियों को उकसाकर वन कर्मचारियों और ग्रामीणों पर प्राणघातक हमला करने की धमकी देते हैं। अनावेदक करताप की आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा पांच के अंतर्गत जिला बदर करने की मांग की गई थी।
आरोपित करताप पर तीन अप्रैल 2021 से 16 जुलाई 23 तक सात वन अपराध विभिन्न धाराओं में दर्ज हैं। वहीं पिपलौद थाने में भी दो प्रकरण बलवा, शासकीय कार्य में बाधा सहित अन्य गंभीर धाराओं में दर्ज हैं। वहीं आरोपित अनसिंग पर 30 नवंबर 23 से 16 मार्च 2024 तक सात वन अपराध दर्ज हैं।
प्रतिवेदन के आधार पर अनावेदक करताप पुत्र लाखासिंग निवासी भिलाईखेड़ा और अनसिंग पुत्र जैमाल निवासी सरमेसर को कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिला पूर्व निमाड़ खंडया और उसके आसपास के सीमावर्ती जिले बुरहानपुर, खरगोन, देवास, बैतूल, हरदा और इंदौर की सीमा से छह माह की अवधि के लिए निष्कासित किया गया है।
इधर, अनावेदकों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जवाब में वन विभाग की कार्रवाई को झूठा करार दिया है। करताप पुत्र लाखासिंग के अधिवक्ता ने आरोपों से इंकार करते हुए बताया कि सूचना पत्र में दर्शित आपराधिक रिकार्ड क्रमांक एक से नौ तक कोई भी प्रकरण अनावेदक के विरुद्ध न तो दर्ज हुआ और न ही न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया और न ही विचाराधीन है।
वन विभाग द्वारा मात्र अपनी कार्रवाई को बल देने के उद्देश्य से बिना किसी आधार के इन प्रकरणों का उल्लेख अपने प्रतिवेदन में किया गया है। सूचना पत्र में उल्लेखित आपराधिक रिकार्ड के क्रमांक आठ पर उल्लेखित प्रकरण का कमांक 176,2022 को ऑनलाइन नेट पर सर्च करने पर यह प्रकरण का क्रमांक 1320,2022 होकर रामलाल नामक व्यक्ति के विरुद्ध अपराध अंतर्गत चारा 34;1 आबकारी अधिनियम के तहत पेश किया गया है।
जो कि समरी प्रकरण होकर 26 अक्टूबर 2022 को इस व्यक्ति को 1000 रुपये दंड अधिरोपित किया गया है। अनावेदक के विरुद्ध किसी भी प्रकार का कोई वन अपराध प्रकरण दर्ज नहीं हुआ और न ही विचाराधीन है। अनावेदक आदिवासी समाज का एक जागरूक नागरिक होकर खेती कर पत्नी, बच्चों और माता- पिता व भाई बहन का लालन-पालन करता है। अत: जिलाबदर की कार्रवाई से मुक्त किया जाए।