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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Khandwa News: करोड़ों की बंधक संपत्ति को फर्जी दस्तावेज बनाकर आधे-पौने दाम में बेचा, BOI के 2 कर्मचारियों सहित 7 पर मामले दर्ज

MP News: बैंक आफ इंडिया के दो अधिकारियों ने बैंक में बंधक रखी संपत्ति को फर्जी दस्तावेज बनाकर साठगांठ से सस्ते में बेच दिया।

By Neeraj PandeyEdited By: Neeraj Pandey
Publish Date: Wed, 20 Mar 2024 08:20:28 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 Mar 2024 08:49:53 PM (IST)
Khandwa News: करोड़ों की बंधक संपत्ति को फर्जी दस्तावेज बनाकर आधे-पौने दाम में बेचा, BOI के 2 कर्मचारियों सहित 7 पर मामले दर्ज
बंधक संपत्ति को फर्जी दस्तावेज बनाकर आधे-पौने दाम में बेचा

HighLights

  1. बंधक संपत्ति को फर्जी दस्तावेज बनाकर आधे-पौने दाम में बेचा
  2. बैंक आफ इंडिया के दो अधिकारियों सहित सात पर प्रकरण दर्ज
  3. बैंक में वेयर हाउस और एक मकान को बंधक रखा था

खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बैंक आफ इंडिया के दो अधिकारियों ने बैंक में बंधक रखी संपत्ति को फर्जी दस्तावेज बनाकर साठगांठ से सस्ते में बेच दिया। इस पर अदालत ने बैंक के दो अधिकारियों समेत पालीटेक्निक कालेज के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों समेत सात लोगों पर धोखाधड़ी, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज और मिलीभगत जैसी धाराओं में प्रकरण दर्ज कर संज्ञान लिया है।

खंडवा के व्यापारी वीरेंद्र अग्रवाल ने बैंक से वेयर हाउस बनाने और व्यापार करने के लिए लगभग चार करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इसके एवज में वेयर हाउस और एक मकान को बंधक रखा था। इस संपत्ति की कम वैल्यू आंक कर आरोपितों ने सारे दस्तावेज जिला पंजीयक कोर्ट और अन्य जगह दे दिए। बाद में यह सब फर्जी साबित हुए।


मामला कोर्ट में आने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहन डाबर के न्यायालय ने बैंक के दो अधिकारी अभिनीत तिवारी और तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राहुल तिवारी के अलावा खरीदार जनरलवीरसिंह उर्फ राजू भाटिया के अलावा बैंक के वैल्यूअर इंजीनियर अश्विनी बाहेती और फर्जी प्रमाण पत्र देने वाले पालीटेक्निक के प्राचार्य अपूर्व साकल्ले, ड्राफ्समैन बीडी सनखेरे के अलावा ठेकेदार दीपेश राठौर पर कई धाराओं में मामला दर्ज किया है।

अदालत में फर्जी साबित हुए दस्तावेज

व्यापारी अग्रवाल ने मीडिया के समक्ष दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि कलेक्टर कोर्ट ने जिस संपत्ति की वैल्यू छह करोड़ 15 लाख रुपये बताई थी। इसे बैंक ने सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपये में धोखाधड़ी कर साठगांठ के तहत बेच दिया। सारे कागज और दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों से बनवा लिए, जो अदालत में फर्जी साबित हुए हैं। इसमें बड़ी भूमिका बैंक के वेल्यूवर अश्विन बाहेती की भी है।

कागज पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2013 में तीन करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक वैल्यू और गाइडलाइन दो करोड़ 95 लाख बताई गई थी। इसी वैल्यूवर ने 2021 में इसी संपत्ति की गाइडलाइन एक करोड़ 43 लाख रुपये बता दी जबकि आठ साल में संपत्ति की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है।

फर्जीवाड़ा ऐसा... वेयर हाउस तोड़ा, 20 दिन में दूसरा भी बना दिया

दो बैंक के अधिकारियों और राजू भाटिया ने साठगांठ कर 2300 वर्गमीटर पर बने वेयर हाउस को मात्र 613 वर्गमीटर बताकर रजिस्ट्री भी कर दी। अग्रवाल ने इसकी शिकायत की। इस पर राजू भाटिया ने ठेकेदार दीपेश राठौर से मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और यह बताने का प्रयास किया कि वेयर हाउस जर्जर हालत में था। जिसे रजिस्ट्री कराने के पहले ही तोड़ दिया गया और रजिस्ट्री कराने के बाद मात्र 20 दिनों में वापस बनाकर खड़ा कर दिया गया।

वेयर हाउस तोड़ने के प्रमाण पत्र भी बनवा लिए

आरोपित भाटिया ने पालीटेक्निक के प्राचार्य अपूर्व साकल्ले और बीडी सनखेरे के साथ मिलकर फर्जी प्रमाण पत्र भी ले लिया। जिसमें बताया गया कि वेयर हाउस तोड़कर नया बनाया गया है। पंजीयक कोर्ट द्वारा शासन की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई गई, जिसमें वेयर हाउस पुराना बताया गया। इसके अलावा एसडीएम न्यायालय द्वारा भी जांच कराई गई, जिसमें राजस्व निरीक्षक व पटवारी प्रतिवेदन मौका पंचनामा तैयार कर वेयर हाउस का निर्माण पुराना होना बताया गया।

इन धाराओं में दर्ज हुआ प्रकरण

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी खंडवा मोहन डाबर ने फैसले के अंत में लिखा है कि दस्तावेजों के आकलन से प्रथम दृष्टया आरोपितगण अभिनीत तिवारी के विरुद्ध धारा 420 /34, 418, 465/34, 468/34, 471/34 भारतीय दंड संहिता 1860 एवं जनरलवीरसिंह उर्फ राजू भाटिया के विरुद्ध धारा 420/34, 465/34 468/34 एवं 471/34 भारतीय दंड संहिता 1860 का अपराध एवं आरोपित राहुल तिवारी के विरुद्ध धारा 420/34, 418 भारतीय दंड संहिता 1860 एवं आरोपी अश्विन बाहेती के विरुद्ध 420/34, 418 एवं आरोपित दीपेश राठौर के विरुद्ध धारा 465/34, 468/34 एवं 471/34 एपी साकल्ले के विरुद्ध धारा 465/34,468/34 एवं 471/34 भारतीय दंड संहिता 1860 एवं आरोपी बीड़ी सनखेरे के विरुद्ध धारा 465/34 468/34, 471/34 के तहत संज्ञान लिया गया है।