
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा, ओंकारेश्वर। नर्मदा के तट पर बसी ओंकारेश्वर की पहचान सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आस्था, पुश्तैनी निवास और रोजी-रोटी से भी जुड़ी है। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
लेकिन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों से प्रभावित होने वाले स्थानीय परिवारों की मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण अब तीर्थनगरी में अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया गया है। सोमवार, 19 अक्टूबर से नगरवासी स्वेच्छा से बंद रखकर अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाएंगे।
स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन के सामने 19 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार की सुरक्षा और किसी भी परिवार को विस्थापित करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत पर वर्षों से बसे परिवारों का घर और पुश्तैनी रोजगार नहीं छिनना चाहिए। डुकिया में पुनर्वास को लेकर भी नागरिकों की चिंता है। उनका मानना है कि मौजूदा धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से दूर जाने पर आजीविका प्रभावित हो सकती है।
नगर बंद के दौरान होटल, रेस्टोरेंट, धार्मिक सामग्री की दुकानें, फूल-प्रसादी, नौका संचालन, ऑटो रिक्शा और तीर्थकर्म से जुड़ी गतिविधियां बंद रखने का आह्वान किया गया है। ऑटो यूनियन, पंडा संघ, नाविक संघ और व्यापारी संघ ने आंदोलन को समर्थन दिया है।
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इस बंद का असर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं पर भी पड़ सकता है। दर्शन के लिए पहुंचने वाले भक्तों को भोजन, प्रसादी, स्थानीय परिवहन और नर्मदा पार करने के लिए नाव जैसी सुविधाएं मिलने में परेशानी हो सकती है।
नगरवासियों की मांग है कि ओंकारेश्वर की धार्मिक पहचान, लोगों की भावनाओं और आजीविका को ध्यान में रखकर विकास की योजना बनाई जाए। अब सवाल यही है कि क्या सरकार और प्रशासन स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनकर ऐसा रास्ता निकालेंगे, जिसमें सिंहस्थ की तैयारियां भी आगे बढ़ें और वर्षों से तीर्थनगरी में बसे परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।