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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गेट से कूदकर जाते हैं किशोर कुमार स्मारक देखने

हरफनमौला किशोरकुमार के स्मारक तक पहुंचने के लिए उनके प्रशंसकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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Publish Date: Mon, 04 Jul 2016 02:58:57 PM (IST)Updated Date: Mon, 04 Jul 2016 03:01:13 PM (IST)
गेट से कूदकर जाते हैं किशोर कुमार स्मारक देखने

खंडवा। हरफनमौला किशोरकुमार के स्मारक तक पहुंचने के लिए उनके प्रशंसकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां स्मारक पर लगे गेट हमेशा बंद रहते हैं। ऐसे में दूर-दूर से खंडवा आने वाले कई किशोरप्रेमी स्मारक को बाहर से देखकर ही लौट जाते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी प्रशंसक हैं जो गेट से कूदकर स्मारक तक पहुंच रहे हैं। स्मारक के लोकार्पण के दौरान इसे हर समय प्रशंसकों के लिए खुला रखने का वादा जनप्रतिनिधियों ने किया था लेकिन स्मारक के गेट केवल किशोरकुमार के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर खोले जाते हैं।

रविवार को किशोरकुमार के स्मारक को निहारने पहुंचे उनके प्रशंसक यहां की व्यवस्थाओं को लेकर नाराज दिखाई दिए। इंदौर जिले के ग्राम पूंजापुरा से आए किशोरप्रेमी पंकज चौहान व देवास के काटाफोड़ निवासी आनंद चंपालाल फौजी दोपहर को जब यहां पहुंचे तो स्मारक के गेट बंद पाए गए। यहां कोई चौकीदार भी मौजूद नहीं था।


लंबी दूरी तय करके खंडवा आए किशोरदा के प्रशंसक लौटना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने गेट कूदकर स्मारक तक पहुंचने का निर्णय लिया। स्मारक को निहारने के बाद वे इसी तरह बाहर भी निकले। आनंद ने बताया कि वे छह महीने में तीसरी बार किशोरकुमार के स्मारक पर आए हैं। हर बार यहां ताला लगा होने से गेट पर चढ़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा।

थियेटर पर नहीं दिखाते फिल्म

किशोरकुमार स्मारक के लोकार्पण के दौरान यहां मिनी थियेटर में प्रतिदिन किशोरदा की फिल्म दिखाने का भी वादा जनप्रतिनिधियों ने किया था लेकिन यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर मिनी थियेटर में प्रोजेक्टर पर कुछ समय के लिए किशोरदा के गीतों का फिल्मांकन कर दिया जाता है। मिनी थियेटर देखरेख के अभाव में बदहाल हो रहा है। छत से बारिश का पानी टपकना शुरू हो गया है।

वहीं किशोरकुमार की समाधि पर भी सफाई और देखरेख का अभाव बना हुआ है। यहां समाधि पर लगी टाइल्स निकलने की कगार पर है। समाधिस्थल और स्मारक की देखरेख के लिए निगम द्वारा यहां एक चौकीदार की नियुक्ति तो की गई है लेकिन व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है या नहीं इसकी निगरानी किसी अधिकारी द्वारा नहीं की जाती।