
गोविंद गीते, खंडवा। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अयोध्या में कारसेवा में पुरुषों ही नहीं, महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शहर से एक दर्जन महिलाओं का समूह अयोध्या पहुंचा था। इन्हीं में पूर्व पार्षद हंसमुखी जोशी भी थीं। 72 वर्षीय जोशी कारसेवा के अपने अनुभव सुनाते हुए गर्वित हो उठती हैं। कहती हैं कि अयोध्या जा रहे थे तो ग्वालियर में पुलिस ने सख्ती दिखाई और लौटने का दबाव बनाया लेकिन हम सबने कहा कि चाहे हमें गोली मार दो, लौटेंगे नहीं।
अयोध्या में 22 जनवरी को होने जा रही रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर पूरा देश उत्साहित है, लेकिन उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है, जिन्होंने अयोध्या में कारसेवक के रूप में रामजन्म भूमि आंदोलन में भागीदारी की। अयोध्या में कारसेवा में योगदान देने वाली दूधतलाई क्षेत्र निवासी हंसमुखी जोशी बताती हैं कि पूर्व विधायक हुकुमचंद यादव के नेतृत्व में खंडवा से 1990 में बड़ी संख्या में कारसेवक रवाना हुए थे। इनमें महिलाएं भी थीं। जब हम ग्वालियर तक पहुंचे तो अयोध्या में गोलीकांड के चलते पुलिस बल की सख्ती शुरू हो गई।
ग्वालियर स्टेशन पर एक पुलिसकर्मी ने महिलाओं से कड़ी पूछताछ की और कहा कि जहां से आई हो लौट जाओ, वरना ठीक नहीं होगा। उसने महिलाओं से अभद्रता भी की। इस दौरान एक भी महिला घबराई नहीं। हमने कहा कि आप गोली चलो दो। घटनाक्रम की जानकारी जब हमारे साथ पहुंचे हुकुमचंद यादव को लगी तो उन्होंने पुलिसकर्मियों से बात करके मामला शांत कराया। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा में हमें झांसी ले जाया गया। यहां किले के सामने व्यायामशाला में हम दो दिन रुके।
हंसमुखी बताती हैं कि झांसी के वो दिन बहुत याद आते हैं। व्यायामशाला में बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे तक हमसे मिलने आते थे। हमें भोजन लाकर देते थे और कहते थे कि आप धन्य हैं, जो अपने परिवार छोड़कर इस नेक काम के लिए जा रहे हो। इधर, अयोध्या में माहौल ठीक नहीं होने के कारण पुलिस अभिरक्षा में हमें ट्रेन से खंडवा लौटा दिया गया। भजन-कीर्तन करते हुए पहुंचे थे अयोध्या दूसरी बार खंडवा से महिलाओं का दल वर्ष 1992 में अयोध्या के लिए रवाना हुआ।
हंसमुखी बताती हैं कि इस दल में 10 महिलाएं थीं। हम सब भजन-कीर्तन करते हुए अयोध्या पहुंचे। वहां हनुमानगढ़ी में ठहरे थे। सरयू नदी में स्नान करने के बाद हम सब एक-एक मुट्ठी बालू रेत लेकर उस स्थान पर रखते थे, जहां राम मंदिर का निर्माण होना था। इस दौरान रामलला हम आएंगे, मंदिर यहीं बनाएंगे जैसे नारे भी लगाते थे। अयोध्या में कारसेवा के दौरान तनावपूर्ण माहौल बन गया था। लाठीचार्ज भी हुआ, लेकिन महिलाएं घबराई नहीं। हम जोश के साथ आगे बढ़े। महिलाएं अयोध्या से ईंट और कवेलू भी लेकर आई थीं।