खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में ओंकारेश्वर बांध के जलाशय में प्रस्तावित 600 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर पार्क के प्रथम चरण में करीब 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन निर्माण, स्वामित्व और परिचालन योजना अंतर्गत होगा। इसके लिए नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा आमंत्रित निविदाएं में रुचि दिखाने वाली एएमपी एनर्जी दिल्ली, एनएचडीसी भोपाल और एसजेवीएन हिमाचल प्रदेश की कंपनियों की दरों को प्रदेश की शिवराज कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इनके द्वारा करीब 100-100 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। निविदाएं और बिजली खरीदी की दरों को स्वीकृति मिलने से फ्लोटिंग सोलर पावर पार्क के कार्य में गति आएगी। इसके चलते वर्ष 2024 तक प्रदेश को बिजली मिलने लगेगी।
मध्य प्रदेश को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और रोशन रखने में जिले की बिजली परियोजनाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यहां 1520 मेगावाट की इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध जल परियोजनाएं तथा 2520 मेगावाट क्षमता की संत सिंगाजी थर्मल पावर परियोजना स्थापित है। आगामी दो साल में 600 मेगावाट सोलर पावर एनर्जी का उत्पादन भी प्रस्तावित है। इसके प्रथम चरण में 300 मेगावाट सोलर एनर्जी के लिए तीन कंपनियों का टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से चयन भी हो गया है। एएमपी एनर्जी, एनएचडीसी और एसजेवीएन कंपनियां क्रमशः 3.21 रुपये, 3.22 रुपये और 3.26 रुपये प्रति यूनिट के लगभग दर का प्रस्ताव दिया था। इसे स्वीकृति मिलने के बाद अब अनुबंध सहित अन्य प्रक्रियां पूर्ण होते ही कंपनियां जलाशय में फ्लोटिंग पैनल लगाकर बिजली का उत्पादन प्रारंभ कर देंगी।
मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम की जननिज भागीदारी योजना अंतर्गत आकार लेने वाले इस सोलर प्लांट के दोनों चरण पूर्ण हो जाने पर हर साल करीब 1200 मिलियन यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन हो सकेगा। यह प्रदेश का पहला पानी पर तैरने वाला सोलर प्लांट होगा। इससे गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलने के साथ ही जलाशय के पानी का वाष्पीकरण भी रुकेगा।
- ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पावर पार्क में प्रथम चरण में करीब 300 मेगावाट सोलर पावर जनरेशन के लिए टेंडर डालने वाली कंपनियों की दरों को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। 100-100 मेगावाट उत्पादन के लिए तीन कंपनियों का चयन मुख्यालय से हुआ है। जल्द ही कंपनियां काम शुरू करेंगी- राजेंद्र गोयल, जिला प्रबंधक ऊर्जा विकास निगम