
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। सिनेमा बनाने के लिए न बड़ा बजट, न महंगा कैमरा और न ही मुंबई जैसा सेट। जरूरत है तो बस कहानी कहने के जुनून और उसे पर्दे पर उतारने के जज्बे की। खंडवा के ग्रामीण अंचल के युवाओं ने इसी सोच को हकीकत में बदल दिया है।
मलगांव के युवाओं ने मोबाइल फोन को कैमरा बनाया और गांव की गलियों, खेतों व सड़कों को फिल्म का सेट। करीब एक साल की मेहनत के बाद एक घंटे की फिल्म ‘गब्बर इज बैक 2.0’ तैयार है। फिल्म 20 अक्टूबर को निमाड़ क्रिएशन के यूट्यूब चैनल पर रिलीज होगी।

इस फिल्म की खास बात यह है कि इसे बनाने वाले युवा पूर्णकालिक कलाकार नहीं हैं। कोई नौकरी करता है तो कोई खेती-किसानी से जुड़ा है। दिनभर अपने काम में व्यस्त रहने के बाद जब समय मिलता, तब फिल्म की शूटिंग होती। किसी ने अभिनय किया तो किसी ने कैमरा संभाला। लोकेशन से लेकर एडिटिंग और तकनीकी काम भी टीम के सदस्यों ने ही किए।
समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने युवाओं को बधाई देते हुए बताया कि निमाड़ क्रिएशन की टीम का यह पहला प्रयास नहीं है। वर्ष 2025 में टीम ने ‘गब्बर इज बैक पार्ट-1 भी मोबाइल से ही शूट कर रिलीज की थी। दर्शकों से मिले प्रोत्साहन के बाद टीम ने दूसरे पार्ट पर काम शुरू किया।
फिल्म के लिए महंगे कैमरे, बड़े सेट या प्रोडक्शन हाउस की जगह उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। गांव की वास्तविक लोकेशन ही फिल्म की खूबसूरती बनी। निर्देशक भावेश पटेल और कमलेश पटेल का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ फिल्म बनाना नहीं, बल्कि उन युवाओं को प्रेरित करना भी है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को रोक देते हैं।
मलगांव के इन युवाओं की फिल्म अब बड़े पर्दे पर नहीं, बल्कि मोबाइल की ही स्क्रीन पर दर्शकों तक पहुंचेगी। सवाल सिर्फ यह नहीं कि फिल्म कैसी बनी है, बल्कि यह भी है कि गांव के इन युवाओं का जुनून कितने दूसरे युवाओं को अपनी कहानी कहने के लिए प्रेरित करता है।