• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • खंडवा

खंडवा में मोबाइल और जुनून के दम पर गांव के युवाओं ने बना डाली एक घंटे की फिल्म, खेती और नौकरी के बाद रात में की शूटिंग

सिनेमा बनाने के लिए न बड़ा बजट, न महंगा कैमरा और न ही मुंबई जैसा सेट। जरूरत है तो बस कहानी कहने के जुनून और उसे पर्दे पर उतारने के जज्बे की। खंडवा के ...और पढ़ें

By Manish KareEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 08:33:13 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 08:41:01 PM (IST)
खंडवा में मोबाइल और जुनून के दम पर गांव के युवाओं ने बना डाली एक घंटे की फिल्म, खेती और नौकरी के बाद रात में की शूटिंग
युवाओं द्वारा तैयार की गई फिल्म का द्श्य। -सौजन्य

HighLights

  1. करीब एक साल की मेहनत से तैयार हुई गब्बर इज बैक 2.0
  2. पहली फिल्म से मिला हौसला, अब दूसरा प्रयास
  3. मोबाइल बना कैमरा और एडिटिंग स्टूडियो

नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। सिनेमा बनाने के लिए न बड़ा बजट, न महंगा कैमरा और न ही मुंबई जैसा सेट। जरूरत है तो बस कहानी कहने के जुनून और उसे पर्दे पर उतारने के जज्बे की। खंडवा के ग्रामीण अंचल के युवाओं ने इसी सोच को हकीकत में बदल दिया है।

मलगांव के युवाओं ने मोबाइल फोन को कैमरा बनाया और गांव की गलियों, खेतों व सड़कों को फिल्म का सेट। करीब एक साल की मेहनत के बाद एक घंटे की फिल्म ‘गब्बर इज बैक 2.0’ तैयार है। फिल्म 20 अक्टूबर को निमाड़ क्रिएशन के यूट्यूब चैनल पर रिलीज होगी।


naidunia_image

इस फिल्म की खास बात यह है कि इसे बनाने वाले युवा पूर्णकालिक कलाकार नहीं हैं। कोई नौकरी करता है तो कोई खेती-किसानी से जुड़ा है। दिनभर अपने काम में व्यस्त रहने के बाद जब समय मिलता, तब फिल्म की शूटिंग होती। किसी ने अभिनय किया तो किसी ने कैमरा संभाला। लोकेशन से लेकर एडिटिंग और तकनीकी काम भी टीम के सदस्यों ने ही किए।

पहली फिल्म से मिला हौसला, अब दूसरा प्रयास

समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने युवाओं को बधाई देते हुए बताया कि निमाड़ क्रिएशन की टीम का यह पहला प्रयास नहीं है। वर्ष 2025 में टीम ने ‘गब्बर इज बैक पार्ट-1 भी मोबाइल से ही शूट कर रिलीज की थी। दर्शकों से मिले प्रोत्साहन के बाद टीम ने दूसरे पार्ट पर काम शुरू किया।

मोबाइल बना कैमरा और एडिटिंग स्टूडियो

फिल्म के लिए महंगे कैमरे, बड़े सेट या प्रोडक्शन हाउस की जगह उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। गांव की वास्तविक लोकेशन ही फिल्म की खूबसूरती बनी। निर्देशक भावेश पटेल और कमलेश पटेल का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ फिल्म बनाना नहीं, बल्कि उन युवाओं को प्रेरित करना भी है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को रोक देते हैं।

मलगांव के इन युवाओं की फिल्म अब बड़े पर्दे पर नहीं, बल्कि मोबाइल की ही स्क्रीन पर दर्शकों तक पहुंचेगी। सवाल सिर्फ यह नहीं कि फिल्म कैसी बनी है, बल्कि यह भी है कि गांव के इन युवाओं का जुनून कितने दूसरे युवाओं को अपनी कहानी कहने के लिए प्रेरित करता है।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ से MP क्यों जा रहे फिल्म प्रोजेक्ट? लोकेशन तो पसंद आई लेकिन... सब्सिडी भुगतान और सरकारी प्रक्रिया बन रही रोड़ा