
खालवा, खंडवा (नईदुनिया न्यूज)। आदिवासी विकासखंड खालवा के रोशनी सेक्टर में घोड़ा पछाड़ नदी पर निर्मित हो रही आंवलिया मध्यम सिंचाई योजना को लेकर ग्रामीणों ने बुधवार को विरोध जताया। इस परियोजना में प्रभावित हुए ग्रामीणों और किसानों को परियोजना का बंद पड़ा कार्य फिर शुरू होने की जानकारी मिली तो ग्रामीण परियोजना स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों को काम करने से रोक दिया। रोशनी क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। यह मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद कंपनी के लोग काम फिर शुरू करने का प्रयास कर रहे है।
परियोजना से प्रभावित ग्राम मुहालखारी, बाराकुंड, भोजढाना, रोशनी के ग्रामीण फूलचंद, सोनाजी मानू ,मुंशी, नन्नू कलमे, रामाधार पटेल ने बताया कि परियोजना में 40 परिवारों के मकान डूब में आ रहे है। इनके विस्थापन की अभी तक कोई व्यवस्था नही की गई है। वहीं, प्रभावित लोगों को जमीन का अनुदान नहीं मिला है। खेतों में लगे पेड़-पौधों व कुओं का भी मुआवजा नही दिया गया है। सिंचित व असिंचित सभी का एक दर पर आकलन किया गया है। हमारी मांगे न माने जाने पर हमने न्यायालय की शरण ली थी अभी तक वहां से भी कोई निराकरण नहीं हुआ है।
बांध निर्माण कंपनी हठधर्मिता के साथ काम चालू करना की कोशिश कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पर्यावरण बोर्ड द्वारा भी नियमों के उल्लंघन के कारण रोक लगा रखी है। इसका भी अभी तक निराकरण नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है। हम इस परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम अपना हक मांग रहे हैं।
आंवलिया बांध का काम 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसके कार्य पर किसी स्तर पर कोई रोक नहीं है। प्रभावितों को गाइड लाइन से चार गुना अधिक दर पर मुआवजा दिया गया है। 40 में से लगभग 38 करो़ड रुपये का मुआवजा बंट चुका है। एनजीटी से भी परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। अनावश्यक रूप से कुछ लोग काम रोक रहे है। वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कर दिया है। पुलिस और प्रशासन की मदद से शेष कार्य बारिश से पहले पूरा किया जाएगा। - मेघा चौरे, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग।