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खरगोन के बड़वाह में फूड पॉइजनिंग से करीब 250 तोतों की मौत, इन्हें चावल डालने पर लगा बैन

बड़वाह में तोतों की मौत के बाद जनता से अपील की है कि कुछ दिनों तक दाना न डालें और यदि डालें तो केवल साफ ज्वार-बाजरा ही डालें, चावल नहीं। फारेस्ट रेंजर...और पढ़ें

By vishal anand chhatiyeEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 30 Dec 2025 08:46:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Jan 2026 02:13:59 PM (IST)
खरगोन के बड़वाह में फूड पॉइजनिंग से करीब 250 तोतों की मौत, इन्हें चावल डालने पर लगा बैन
तोतों के शव पाए जाने से मचा हड़कंप।

HighLights

  1. तीन दिनों के अंदर बड़वाह में करीब 250 तोतों की हो गई मौत
  2. कुछ तोते जिंदा भी मिले थे, लेकिन फूड पॉइजनिंग का असर गहरा था
  3. लोगों द्वारा अनजाने में डाला गया गलत भोजन इसका कारण बना है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बड़वाह। यहां एक्वाडक्ट पुल के पास पिछले तीन दिनों में करीब 250 तोतों की मौत का मामला भोपाल तक पहुंच गया है। खरगोन कलेक्टर और पशु चिकित्सा एवं डेयरी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गुरुवार सुबह विभाग के उपसंचालक जीएस सोलंकी बड़वाह पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थानीय पशु चिकित्सकों के साथ बैठक की। निरीक्षण के बाद उपसंचालक सोलंकी ने प्रारंभिक जांच में इसे 'बर्ड फ्लू' या किसी संक्रामक बीमारी का मामला मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह 'फूड पॉइजनिंग' (विषाक्त भोजन) का प्रतीत हो रहा है।

पशु चिकित्सक मनीषा चौहान ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मृत तोतों में फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण मिले हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "कई बार लोग पक्षियों को खाने में ऐसी चीजें डाल देते हैं जो उनके पाचन तंत्र के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। इसके अलावा, पक्षी अक्सर खेतों में कीटनाशक छिड़काव के बाद वहां से दाना चुग लेते हैं, जो जानलेवा साबित होता है।"


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हालांकि, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए भोपाल और जबलपुर लैब से विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। सावधानी के तौर पर क्षेत्र के सभी पोल्ट्री फार्मों की जांच की गई है, जहां बर्ड फ्लू का कोई लक्षण नहीं मिला है। उपसंचालक ने इस मामले में वन विभाग के रवैये को 'सुस्त' बताया और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा विभाग सक्रिय है, लेकिन वन विभाग को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह नहीं दिखी।

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वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए

सोलंकी के अनुसार, पुल पर लोगों को दाना डालने से रोकने के लिए वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में एसडीओ से की गई बातचीत का जवाब संतोषजनक नहीं था। उपसंचालक के घटनास्थल निरीक्षण के दौरान बगीचे में बांस और अन्य पेड़ों पर अब भी मृत तोतों के शव लटके हुए मिले। हालांकि, ज़मीन पर कोई नया शव नहीं पाया गया।

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साफ ज्वार-बाजरा ही डालें, चावल नहीं

सोलंकी ने डॉक्टर जितेंद्र सैते और उनकी टीम को अगले कुछ दिनों तक लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पशु चिकित्सक डाक्टर सुरेश बघेल ने बताया कि लोग अभी भी पुल की रेलिंग पर चावल और अन्य सामग्री डाल रहे हैं, जिसे आज हटाया गया। उन्होंने जनता से अपील की है कि कुछ दिनों तक दाना न डालें और यदि डालें तो केवल साफ ज्वार-बाजरा ही डालें, चावल नहीं। फारेस्ट रेंजर निशांत डोसी ने जानकारी दी कि वनकर्मी निगरानी कर रहे हैं और नगर पालिका ने सफाई कार्य भी किया है। उन्होंने बताया कि अब सुबह 6 से 8 बजे तक वनकर्मियों की 'स्थाई ड्यूटी' लगाई जाएगी, जो लोगों को इस संबंध में जागरूक करेंगे।