
विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव/ खरगोन
करोड़ों के अतिरिक्त खर्च के बावजूद महत्वपूर्ण बांध परियोजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। आंदोलनों ने इनकी राह में ऐसे रोड़े अटकाए कि पूर्णता के निकट पहुंच कर भी ये अधूरी हैं। इसका सीधा असर बढ़ती लागत के रूप में सामने आ रहा है। आदिवासी अंचल की सबसे अहम खारक बांध परियोजना को भी लगभग एक वर्ष का विलंब हो चुका है। भगवानपुरा क्षेत्र के ग्राम चौखंड के पास खारक नदी पर जलाशय का निर्माण जारी है। इस परियोजना से सिंचाई सुविधा के साथ खरगोन जिला मुख्यालय के लिए पेयजल आपूर्ति भी होना प्रस्तावित है। आंदोलन आड़े नहीं आए, तभी मानसून पूर्व यह परियोजना पूरी हो सकेगी।
खारक बांध परियोजना से जुड़े प्रभावितों के लिए जागृत आदिवासी संगठन ने पुरजोर तरीके से पुनर्वास और मुआवजे के लिए मांग रखी। कई बार संगठन कार्यकर्ता और प्रशासन आमने-सामने हो चुके हैं। लाठीचार्ज भी हो चुका है। आंदोलनकारी जेल भी जा चुके हैं। संगठन नेत्री माधुरी बेन के आरोप हैं कि इस परियोजना में आदिवासी ठगे गए।
खारक बांध परियोजना
* 4913.59 लाख रुपए की परियोजना।
* 6 जून 12 को दिया बांध का ठेका
* 2277.62 लाख रुपए से खारक नदी पर ग्राम चौखंड में जलाशय निर्माण।
* 9.50 किमी की मुख्य नहर व 15 किमी की अन्य 5 लघु नहरों का निर्माण प्रस्तावित।
* 1065 मीटर मिट्टी के बांध की लंबाई।
* 18.25 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी जलभराव क्षमता।
* 2640 हेक्टेयर कृषि भूमि में होगी सिंचाई।
अधर में अन्य परियोजनाएं
*इंदिरा सागर परियोजना की नहरें भी निर्माणाधीन हैं। लगभग 243 किमी लंबी इस नहर परियोजना का अधिकांश हिस्सा खरगोन जिले में है। वर्ष 2001 से नहर निर्माण कार्य शुरू हुआ। अब तक 50 फीसद कार्य ही हो सका है। इस परियोजना से 1.23 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। *इसी परियोजना में शामिल खरगोन उद्वहन सिंचाई परियोजना की लागत 3182.76 करोड़ थी, जो 4604 करोड़ पर पहुंच गई है। विभिन्ना आंदोलन और प्रभावितों की मांगों का निराकरण समय पर नहीं होने के कारण यह हालात बने।
*ओंकारेश्वर बांध परियोजना की नहरें भी अभी पूरी नहीं हुई हैं। 254.80 करोड़ की लागत से नहर निर्माण कार्य जारी है। इसका कुल कमांड क्षेत्र 2 लाख 14 हजार 106 हैक्टेयर है। इसी तरह महेश्वर बांध परियोजना की लागत भी 365 करोड़ से 4 हजार 500 करोड़ पर पहुंच चुकी है।
मानसून पूर्व उम्मीद
खारक बांध परियोजना का काम मानसून पूर्व पूरा होने की उम्मीद है। लगभग सभी प्रकरणों के निराकरण करवा दिए हैं। इस परियोजना का लाभ जिलेवासियों को मिलेगा।- राजेश पटवा, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, खरगोन