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खरगोन जिले में 10 फीसद कम बारिश, छोटे और बड़े जलाशयों में 87 फीसद ही जलभराव

Khargone Rainfall: जलाशयों की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने रबी सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार जिले में कुल 3.77 लाख हेक्टेयर भूमि में रब...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 02:29:36 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 02:36:38 PM (IST)
खरगोन जिले में 10 फीसद कम बारिश, छोटे और बड़े जलाशयों में 87 फीसद ही जलभराव
खरगोन. जिले के बामंदी क्षेत्र स्थित साटक बांध अब तक ओवरफ्लो हो रहा है।-नईदुनिया

HighLights

  1. पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मी के दौरान आ सकती है परेशानी
  2. गेहूं का रकबा घटा और चने का रकबा बढ़ा
  3. पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। खरगोन जिले में मानसून की विदाई के मुहाने पर इस बार बारिश का आंकड़ा औसत के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम दर्ज किया गया है। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि जिले के छोटे और बड़े जलाशयों में जलभराव की स्थिति काफी संतोषजनक है और इनमें फिलहाल 87 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।

आदिवासी बहुल क्षेत्र के प्रमुख जलस्रोत देजला देवाड़ा और अपरवेदा बांध सहित बामंदी क्षेत्र का साटक बांध पिछले एक महीने से लगातार ओवरफ्लो हो रहे हैं, जिससे फिलहाल सिंचाई और पेयजल को लेकर बड़ी राहत मिली है। हांलाकि गर्मी के दौरान कुछ क्षेत्रों में समस्या आने की आशंका भी है।


भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, खरगोन जिले में इस सीजन में अब तक 759.46 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले साल की इसी अवधि (749 मिमी) की तुलना में मामूली अधिक है। हालांकि, जिले की कुल वार्षिक औसत बारिश 828.04 मिमी है। औसत की तुलना में 10 प्रतिशत की कमी रहने के बावजूद जलाशयों में पर्याप्त पानी सुरक्षित होने से वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है।

गर्मी में पहाड़ी अंचलों में बढ़ सकती है चुनौती

जल संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में बांधों और तालाबों में उपलब्ध जल स्तर के कारण रबी सीजन की शुरुआत में कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी। लेकिन बारिश में रही कमी का असली असर गर्मी के दिनों में देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से जिले के दूरस्थ पहाड़ी और आदिवासी इलाकों में भूजल स्तर गिरने से पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।

3.77 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य, बदला फसल चक्र

जलाशयों की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने रबी सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार जिले में कुल 3.77 लाख हेक्टेयर भूमि में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पानी की उपलब्धता और किसानों के रुझान के आधार पर फसल पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है।

पानी की खपत और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस बार गेहूं की बुवाई में 23 हजार हेक्टेयर की कमी आने का अनुमान है, वहीं कम पानी में बेहतर पैदावार देने वाले चने के क्षेत्रफल में 20 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

अधिकारियों का कहना है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी होने से रबी फसलों की सिंचाई सुचारू रूप से हो सकेगी, लेकिन आगामी ग्रीष्मकाल को देखते हुए जल संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग पर अभी से ध्यान देना आवश्यक होगा।

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